हिंदुस्तान के इतिहास की एक ऐसी शख्सियत जिससे मैं हमेशा प्रभावित रहूँगा वो हे झांसी की रानी लक्ष्मी बाई 🇮🇳✒️✒️चमक उठी सन 57 की वह तलवार पुरानी थी बुंदेले हरबोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी – किस्मत न्यूज

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हिंदुस्तान के इतिहास की एक ऐसी शख्सियत जिससे मैं हमेशा प्रभावित रहूँगा वो हे झांसी की रानी लक्ष्मी बाई 🇮🇳✒️✒️चमक उठी सन 57 की वह तलवार पुरानी थी बुंदेले हरबोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी

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हिंदुस्तान के इतिहास की एक ऐसी शख्सियत जिससे मैं हमेशा प्रभावित रहूँगा

 

नाम हैँ

 

🌹🌹🌹रानी लक्ष्मी बाई 🌹🌹🌹

 

 चमक उठी सन 57 की वह तलवार पुरानी थी बुंदेले हरबोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी 

 

1857 के पहले स्वतंत्रता संग्राम में रानी लक्ष्मीबाई ने अहम भूमिका निभाई थी। 2 जून को उन्होंने ग्वालियर के दुर्ग पर कब्जा किया था

 इससे जुड़े कुछ पहलुओं को सामने ला रहा है।

-1857 के सितंबर तथा अक्टूबर में पड़ोसी राज्य ओरछा तथा दतिया के राजाओं ने झांसी पर आक्रमण किया तो रानी ने अपनी सेना से इसे विफल कर दिया ।

– जनवरी 1858 में अंग्रेज सेना ने झांसी की ओर बढ़ना शुरू किया और मार्च में शहर को घेर लिया था।

– हफ्तों की लड़ाई के बाद अंग्रेजी सेना ने शहर पर कब्जा कर लिया, लेकिन रानी बेटे दामोदर राव के साथ अंग्रेजों से बच कर भाग निकलने में सफल रहीं। रानी झांसी से कालपी पहुंचीं और तात्या टोपे से जा मिलीं।

– 22 मई को करैरा में रानी की सेना को जनरल ह्यूरोज की अंग्रेजी सेना से फिर हारना पड़ा।

– इसके बाद ह्यूरोज ने कालपी को घेर लिया, रानी को वहां से भी भागना पड़ा।

– तात्या और रानी की संयुक्त सेनाओं के ग्वालियर आने की खबर सुन कर अंग्रेजों से नाराज ग्वालियर की सेना ने विद्रोह कर दिया।

– 1 जून की शाम ग्वालियर की विद्रोही सेना के सहयोग से रानी ने शहर के घास मंडी की तरफ से ग्वालियर के अजेय किले को घेर लिया।

– 2 जून को सुबह ग्वालियर की सेना की बताई कमजोर प्राचीर को तोड़ कर विद्रोही सेना ने किले पर कब्जा कर लिया।

– ग्वालियर के कम उम्र महाराजा जयाजीराव सिंधिया कूटनीति के तहत भाग कर अंग्रेजों की शरण में आगरा चले गए।

– ग्वालियर विजय की खबर सुनकर बिठूर से नाना साहेब पेशवा भी ग्वालियर किले पर रानी से आ मिले।

नाना की अदूरदर्शिता से हारी रानी

– रानी जानती थी कि जब तक ग्वालियर की सेना उसके साथ है और वह अंग्रेजों को घेरकर हरा सकती है।

– रानी को मालूम था कि अंग्रेज जयाजी राव सिंधिया को जल्दी ही ज्यादा सैनिक देकर आगरा से ग्वालियर भेजेंगे।

-विद्रोहियों की सेना का मनोबल बना रहे, इसके लिए ज्यादा अंग्रेज सैनिक आने से पहले ही पूरा होल्ड रानी करना चाहती थी।

-इस प्रयास में नाना थोड़े ढीले हो गए और दुर्ग में आमोद-प्रमोद में लग गए। जिससे अंग्रेज सैनिकों को एकत्र होने का मौका मिल गया।

– रानी की आशंका के मुताबिक ही अंग्रेजों ने जयाजीराव को आगे कर ग्वालियर पर आक्रमण कर दिया, तो ग्वालियर की सेना ने हथियार डाल दिए।

– रानी कोे किले से बाहर निकलना पड़ा, और उनके बलिदान के बाद आजादी के लिए लड़ रही सेना तितरबितर हो गई

 

 रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान शत शत शत शत शत नमन

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