नौ घंटे की ट्रिप के लिए कुल चार करोड़ के टिकट लिए थे। सुबह नौ बजे पनडूब्बी मे बैठे शाम छह तक लौटना था लेकिन आज हालत ये है की दोनों के जिस्म के टुकडे तक नहीं मिले और कहा जा रहा है की मिलेंगे भी नहीं क्यूंकि सिर्फ डेढ़ घंटे बाद ही ऐसा विस्फोट हुआ की पनडूब्बी के चीथड़े बिखर गए।
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~~ मौत की जगह तक पहुंचने के लिए दो करोड़ थी एक टिकिट की क़ीमत! ~~
मौत बरहक़ है और हर जानदार को इसका मज़ा चखना है। इसकी वक़्त, जगह और वजह सब तय है। अगर आपकी मौत खुदा ने समंदर की गहराई में लिखी है, तो ऐसे हालात बन जाएंगे के आप वक़्त पर वहां पहुंचने के लिए दुनिया की सबसे महंगी और सुरक्षित टाइटन पनडुब्बी तक भी किराए पर ले लेंगे!
शहजादा दाऊद ‘हरक्यूलिस कॉरपोरेशन’ के मालिक थे साथ ही प्रिंस चार्ल्स द्वारा गठित की गई चैरिटेबल ट्रस्ट ‘प्रिंस ट्रस्ट इंटरनेशनल’ के सलाहकार भी थे। आप पकिस्तान के सबसे अमीर तरीन इंसान थे, जिन्हे टाइटैनिक का भयंकर वाला क्रेज़ था और जब टाइटैनिक के मलबे को देखने का मौका मिला तो फोरन तैयार हो गए और अपने साथ बेटे सुलेमान दाऊद को भी लें लिया जो हरगिज़ जाना नहीं चाहता था, जिसने अपने डर का इज़हार अपनी फुफी से भी किया था लेकिन बाप की ज़िद के आगे झुक गया।
नौ घंटे की ट्रिप के लिए कुल चार करोड़ के टिकट लिए थे। सुबह नौ बजे पनडूब्बी मे बैठे शाम छह तक लौटना था लेकिन आज हालत ये है की दोनों के जिस्म के टुकडे तक नहीं मिले और कहा जा रहा है की मिलेंगे भी नहीं क्यूंकि सिर्फ डेढ़ घंटे बाद ही ऐसा विस्फोट हुआ की पनडूब्बी के चीथड़े बिखर गए।
नोट : फोटो उसी पनडूब्बी का है जिसमे शहज़ादा और सुलेमान सवार थे।
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