यदि हम एकात्म मानवता वाद,वसुधैव कुटुंबकम व सह-अस्तित्व के यथार्थ मे विश्वास करते हैं,तो हम अपने पड़ोसी से किसी भी पूर्वाग्रह से ग्रस्त होकर घृणा,वैमनस्यता व अमानवीयता का कार्य,व्यवहार व आचरण नहीं कर सकते हैं। ऋग “भारती “
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