मध्यप्रदेश में करारी हार की तरफ बढ़ती बीजेपी, पलटवार की तरफ बढ़ती जनता*बैतूल से किस्मत न्यूज संवाददाता अकरम पटेल की रिपोर्ट👍राजनीतिक विशेषज्ञों के विचार 👍 – किस्मत न्यूज

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मध्यप्रदेश में करारी हार की तरफ बढ़ती बीजेपी, पलटवार की तरफ बढ़ती जनता*बैतूल से किस्मत न्यूज संवाददाता अकरम पटेल की रिपोर्ट👍राजनीतिक विशेषज्ञों के विचार 👍

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*मध्यप्रदेश में करारी हार की तरफ बढ़ती बीजेपी, पलटवार की तरफ बढ़ती जनता*

 

मध्यप्रदेश विधानसभा का चुनाव इस बार दिलचस्प होने वाला है, मुख्य मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी में तो है ही, पर इससे ज्यादा ये जनता और बीजेपी के बीच सीधा मुकाबला नजर आ रहा है। जिन घोषणाओं को शिवराज गेम चेंजर मान रहे थे, वो गले की हड्डी बन गई हैं। शिवराज ने सोचा था की आख़री के चार महीनों में इतनी रेवड़ियाँ बाटूंगा की लोग 18 साल की भूख भूल जायेंगे। शिवराज ने शुरुआत भी अच्छी की, मगर जनता ने सवाल उठाना शुरू कर दिया की 18 साल तक कहाँ थे ? क्यों जाते जाते याद आई लाड़ली बहना की ?

 

कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने भी लगभग हर मंच से एक ही सवाल पूछा है की 18 साल तक कहाँ थे शिवराज ? आख़री 4 महीनो में शिवराज को बहने याद आ रही हैं, किसान याद आ रहे हैं, कर्मचारी याद आ रहे हैं…शिवराज को सब कुछ याद आ रहा है।

 

*शिवराज की घोषणाबाज़ी का नतीजा यह निकला की जो बीजेपी फरवरी में टक्कर में नजर आ रही थी, सितम्बर आते-आते वो 60-70 सीट में सिमटती नजर आने लगी। पिछले 7 महीनों में बीजेपी ने करीब 5% वोट शेयर और लगभग 50 सीटों में अपनी पकड़ खोई है, वहीं कांग्रेस अब 150 से अधिक सीटों को जीतने का दम भर रही है।*

 

कर्नाटका की जीत से उत्साहित कांग्रेस इस चुनाव में रणनीतिक फैसले कर रही है, वहीं बीजेपी गलतिओं पर गलती दोहराती जा रही है। बीजेपी के किसी तथाकथित रणनीतिकार ने उन्हें सलाह दे मारी की कांग्रेस की सारी घोषणाओं को लागू कर दो। कारारी पराजय की आहट से बौखलाए शिवराज ने भी आगा-पीछा सोचे बगैर इस सुझाव को मान लिया और कांग्रेस के बिछाए जाल में उलझ गए।

 

अब बीजेपी जो कर रही है वो कांग्रेस की नकल है। मतलब साफ़ है की बीजेपी के पास खुद का कुछ भी नहीं है, केवल नकलची होने के। अब आप सब यह तो जानते ही होंगे की भारतीय समाज में असली और नकली के फर्क को कितना महत्त्व दिया जाता है। मतलब अब मुकाबला केवल कांग्रेस और बीजेपी का नहीं बल्कि असली कांग्रेस और नकली बीजेपी का भी है।

 

राजनीतिक पंडितों की मानें तो यह बात भी चर्चा में है की कमलनाथ अगर 15 महीनों के लिए सरकार में नहीं आते, तो शिवराज के पास तो न कोई सोच थी, न कोई योजना और न मध्यप्रदेश के विकास का कोई विजन। वो तो कमलनाथ थे जिन्होंने 15 महीनों में इतनी योजनायें चालू कर दीं की बीजेपी को भी पता चला की सरकार क्या होती है, और बीजेपी नक़ल करने बैठ गई।

 

*बहरहाल यह विधानसभा चुनाव अब न तो टक्कर का बचा है, न भविष्य की गर्त में कुछ छिपा दिख रहा है। कांग्रेस की प्रचंड जीत और बीजेपी की करारी हार की इबारत लिख चुका यह चुनाव अब मध्यप्रदेश में बीजेपी के जीवनकाल की सबसे अधिक सीटों से पराजय का इतिहास लिखने वाला है।*

 

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