पैगाम ऐ पतंग
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” सिराज ऐ मुनीर “
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Respected sisters and brothers,
अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह व बरकतुल्लाह।
” पैगाम ऐ पतंग “
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बनी आदम की ज़िंदगी में सभी रिश्तों की कामयाबी व खुशहाली के लिए पतंग की साख्त व परवाज़ के हवाले से गहरा पैगाम पोशीदा है।
पतंग की कमान,
कागज,जोत व धागा वगैरह सभी का इजतिमाई पैगाम है कि इंसानी रिश्ते फिक्र व प्यार के कच्चे धागे से बंधे होकर इन रिश्तों की खुशहाली व कामयाबी के लिए फिक्र व फैल की सतह पर जोत की तरह तवाज़ून (balance),ताव (paper)की तरह हल्कापन,(मासूमियत) कमान की तरह नरम ( मनफ़ी ज़िद व अकड़ का न होना) व हवा के रूख के मुक़ाबिल (adverse circumstances of life) परवाज़ करने के लिए जोश व वलवला (enthusiasm) की दरकार होती है।
इक़बाल “नूरानी “
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Regards:Iqbal Khan Gauri,Retired District Judge,M.P.
Now:Law adviser and Human duties Activist,Ujjain.
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