देवताओं ने स्थापित किया था श्री यंत्र पर देवपथ शिवलिंग
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*मां नर्मदा की परिक्रमा देवताओं ने प्रारम्भ की व परिक्रमा समापन पर छोटे शिवलिंग की स्थापना की* 
26/फरवरी/2025
धर्मेन्द्र(छोटू)यादव
बड़वानी मध्य प्रदेश
बड़वानी (मध्य प्रदेश)/ खंडवा -बड़ौदा राष्टीय राजमार्ग क्र 26 मां नर्मदा पर बने नए पुल से मात्र दो किलोमीटर दूर उत्तर तट पर स्थित ग्राम -बोधवाड़ा, कुक्षी तहसील का अंतिम गांव हैं।मध्यप्रदेश में उज्जैन और ओंकारेश्वर के ज्योतिलिंग महत्व और मंदिर को हर कोई जानता है पर हम ऐसे शिवलिंग के बारे में बता रहे हैं जिसका उल्लेख नर्मदा पुराण और शिवपुराण में है। इसे देवपथ शिव मंदिर कहते हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार देवता ने स्वयं मंदिर में शिवलिंग स्थापित किया। यहां से भगवान विष्णु ने नर्मदा परिक्रमा प्रारंभ की और समापन किया। मंदिर रुद्रयंत्र पर स्थापित है। ये मंदिर बड़वानी के नर्मदा के तट के पास धार जिले के ग्राम बोधवाड़ा में है।
*प्राचीन देवपथ महादेव मंदिर का महत्व*
पुण्य सलिला मां नर्मदा की परिक्रमा का महत्व यूं ही नहीं है। स्वयं देवताओं ने मां नर्मदा की परिक्रमा की थी। तब से ये परिक्रमा का पावन पुण्य समूचे विश्व में विख्यात है। नर्मदा तट पर अति प्राचीन देवपथ महादेव मंदिर इसलिए महत्वपूर्ण है कि इसी मंदिर से सृष्टि के रचयिता भगवान विष्णु ने देवताओं के साथ शिवलिंग की पूजा-अर्चना कर नर्मदा परिक्रमा प्रारम्भ की और समापन भी यही किया था परिक्रमा समापन के दौरान छोटे शिवलिंग की स्थापना की।
*मंदिर रुद्र महायंत्र के रूप में निर्मित*
पुराणों के अनुसार इस देवपथ मंदिर के शिवलिंग की स्थापना भी देवताओं ने ही की थी। बड़वानी शहर से सटे कसरावद तट के उत्तरी किनारे पर बोधवाड़ा गांव में इस पौराणिक और धार्मिक महत्व के देवपथ महादेव मंदिर का वास्तु भी समूचे भारत में सम्भवतः अद्वितीय है। ये मंदिर रुद्र महायंत्र के रूप में निर्मित है जबकि शिवलिंग के ऊपर गुम्बद का आकार श्री यंत्र पर बना है।
*शिवलिंग का 11 फीट हिस्सा जमीन के अंदर*
इस मंदिर के बारे में किवदंती है कि वर्तमान में मौजूद जलाधारी से ऊपर की और दिखने वाले शिवलिंग का लगभग 11 फीट लम्बा हिस्सा भूमिगत है। इस तरह शिवलिंग की ऊंचाई 12 फीट है। इस मंदिर में यूं तो क्षेत्रीय श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहा रहता है, लेकिन क्षेत्र के बाहर लोग इस देवपथ शिव मंदिर की पौराणिकता से अनजान हैं। महाशिवरात्रि पर्व पर इस अद्भुत चमत्कारिक महादेव मंदिर में पूजन और अभिषेक का सर्वाधिक महत्व है। कालसर्प दोष का निवारण भी यहां होता है। गन्ने के रस से इस शिवलिंग पर अभिषेक करने पर शिव जी जल्दी प्रसन्न होते हैं और आर्थिक समस्या से जल्द छुटकारा मिलता है।
*पुरातत्व विभाग के मुताबिक 900 साल पुराना मंदिर*
शिव पुराण ,नर्मदा पुराण, और स्कन्द पुराण में इस देवपथ महादेव मंदिर के महत्व को स्पष्ट रूप से समझाया गया है। सर्व मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला ये शिवतीर्थ ज्योतिर्लिंगों के समान है। पुरातत्व विभाग के अनुसार ये मंदिर 900 साल पुराना है। इसका निर्माण 12वीं शताब्दी में होना बताया जाता है। वहीं कालांतर में धार के राजा ने 18वीं शताब्दी में इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया था। समय के साथ-साथ मंदिर का बाहरी हिस्सा क्षरण और नर्मदा की बाढ़ के प्रभाव मन्दिर के रुद्र यंत्र पर दिखाई पड़ता है। देवपथ मंदिर अर्थात देवताओं के रास्ते का सूचक इस मंदिर के बाहर रुद्र यंत्र जिसके 36 कोण हैं। शास्त्रों और वेदों के अनुसार एक-एक कोण में देवता विद्यमान हैं और साथ ही चारों ओर द्वारपाल भी
विराजित हैं। प्रत्येक कोण एक-एक करके 36 दिनों में खुलते हैं।
*श्रावण मास और महाशिवरात्रि में प्रदेश व देश से पहुंचते है श्रद्धालु*
बड़ी संख्या में दूर- दूर से श्रद्धालु श्रावण मास में व शिवरात्रि पर रात्रि में चार पहर के अभिषेक और जागरण का कार्यक्रम होते हैं।श्रावण मास में पूरे मास भक्तों अभिषेक व पूजन अर्चन चलता रहता है सरदार सरोवर परियोजना बांध बनने के कारण यह मंदिर वर्तमान में डूब क्षेत्र में घोषित किया है बैक वाटर के बाद बाद मंदिर के चारों तरफ पानी ही पानी हो जाता है व मंदिर टापू बन जाता है।
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