सूरह तहरीम की आयत नम्बर 08 व 09 में तौबा व जिहाद का बयान है ।
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” फिक्र ऐ नूरानी “
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Respected sisters and brothers.
अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह व बरकतुल्लाह।
” अट्ठाईसवां पारह क़द-समि-अल्लाहु का ख़ुलासा (summary)”
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(1) ये पारह सूरह मुजादला (मुकम्मल),सूरह हश्र(मुकम्मल),सूरह मुम्तहिना (मुकम्मल),सूरह सफ्फ (मुकम्मल), सूरह जोमोआ(मुकम्मल),
सूरह मुनाफिकून (मुकम्मल),सूरह तग़ाबुन (मुकम्मल),सूरह तलाक़ (मुकम्मल) और सूरह तहरीम (मुकम्मल) कुल 09 सूरह पर मबनी है।
(2)सूरह मुजादला की आयत नम्बर 01से 04 मे दौरे जहालत मे राईज़ तलाक़ का एक तरीका “ज़िहार” की तशरीह की गई है।
(3)सूरह मुजादला की आयत नम्बर 07 में बयान है कि अल्लाह सुबहाना तआला अपने बंदों के साथ हमेशा मौजूद होता है।
(4) सूरह हश्र की आयत नम्बर 07 में बयान है कि दोलत की गर्दिश मआशरे में जारी रहना चाहिए ताकि दौलत चंद अमीरों में ही न सिमट जावे।
(5)सूरह हश्र की आयत नम्बर 16 में मआशरती हक़ीक़त बयान की गई है कि शैतान इब्ने आदम को खूब उकसाकर उसे मुनकर और काफिर बनाकर खुद को अलग कर लेता है,और कहता है कि वह तो अल्लाह का ख़ोफ रखता है।
(6)सूरह मुम्तहिना की आयत नम्बर 09 में बयान है कि जुल्म करने वाले काफिरों से मौमिन कोई ताअलूक़ न रखें।
(7)सूरह सफ्फ की आयत नम्बर 02 व 03 में बयान है कि अल्लाह सुबहाना तआला को यह पसंद नहीं है कि कोई मौमिन बंदा जो कहे ,उसे करे नहीं।
(8)सूरह सफ्फ की आयत नम्बर 06 में रसूलुल्लाह(स.अ.व.) का नाम “अहमद “बयान हुआ है।
(9) सूरह सफ्फ की आयत नम्बर 08 में बयान है कि अल्लाह सुबहाना तआला का नूर हर हाल में कुफ्र पर ग़ालिब होता हैं।
(10)सूरह जुमआ की आयत नम्बर 05 बयान किया गया है कि सही इल्म हासिल न कर गैर ज़रूरी इल्म हासिल करना ऐसे है,जैसे कोई गधा अपने ऊपर किताबों का ढ़ेर लाद कर इधर उधर घूमता फिरता रहता है।
(11)सूरह जुमआ की आयत नम्बर 09 से 11 में जुमआ की नमाज़ की अहमियत व अहतमाम का जिक़्र है।
(12)सूरह मुनाफिकून की आयत नम्बर 10 व 11 में बयान है कि इब्ने आदम अपनी जिंदगी का आखरी दिन आने से पहले अल्लाह की दी गई दौलत को अल्लाह की राह में खर्च कर अल्लाह के सादिक़ बंदों में शामिल हो जावे क्योंकि आखरी दिन की दस्तक होने पर अल्लाह किसी की जान को हरगिज़ मोहलत नहीं देता है।
(13)सूरह तग़ाबुन की आयत नम्बर 01 व 02 मे बयान है कि कुल क़ायनात अल्लाह सुबहाना तआला की अज़मत,पाकिज़गी व क़ुदरत बयान करतीं रहतीं हैं।उसी ने इब्ने आदम को पैदा किया हैं,जिनमें कुछ ईमानवाला है,और कोई काफिर है।
(14) सूरह तलाक़ की आयतों में तलाक़ का अहसन तरीका बयान किया गया है।
(15)सूरह तहरीम की आयत नम्बर 01से 05 में रसूलुल्लाह (स.अ.व.) और उनकी अजवाज़े मुतहरिन के बीच पैदा तनाज़ा (dispute) का ज़िक्र है।
(16)सूरह तहरीम की आयत नम्बर 08 व 09 में तौबा व जिहाद का बयान है ।
(17) सूरह तहरीम की आयत नम्बर 11में बयान है कि मौमिन बंदा रोज़े क़यामत हसब व नसब से नहीं बल्कि अपने ईमान व नेक आमाल की बदौलत कामयाबी का परवाना हासिल करेगा।
इक़बाल ” नूरानी “
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Regards:Iqbal Khan Gauri,Retired District Judge,M.P.
Now:Law adviser & Human duties Activist,Ujjain.
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