*मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के मंच से प्रभारी मंत्री की तस्वीर गायब, आमला में खड़ा हुआ सियासी तूफान* – किस्मत न्यूज

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*मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के मंच से प्रभारी मंत्री की तस्वीर गायब, आमला में खड़ा हुआ सियासी तूफान*

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अकरम खान पटेल की रिपोर्ट 

आमला जनपद पंचायत द्वारा ग्राम पंचायत देवगांव के ग्राम कजली में आयोजित मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत सामूहिक विवाह कार्यक्रम भले ही सामाजिक दृष्टि से सफल रहा हो, लेकिन आयोजन में प्रभारी मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल की तस्वीर मंच पर न लगने से राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है।

 

इस कार्यक्रम में 384 वर-वधू विवाह के पवित्र बंधन में बंधे, जिनमें 294 अनुसूचित जनजाति वर्ग के थे और उन्होंने परंपरागत तरीके से विवाह किया, जबकि 90 जोड़ों का विवाह गायत्री परिवार की वैदिक पद्धति से संपन्न हुआ।

 

कार्यक्रम में मौजूद रहे कई बड़े जनप्रतिनिधियों में शामिल थे—केंद्रीय राज्य मंत्री और सांसद डीडी उईके, विधायक डॉ. योगेश पंडाग्रे, अनुविभागीय अधिकारी शैलेन्द्र सिंह बडोनिया, जनपद अध्यक्ष गणेश यादव, नगर पालिका अध्यक्ष नितिन गाडरे, उपाध्यक्ष किशोर माथनकर, जनपद सीईओ संजीव श्रीवास्तव, पंचायत प्रतिनिधि एवं अन्य गणमान्य नागरिक।

 

लेकिन जब मंच पर नजरें गईं, तो एक बात ने सभी को चौंका दिया—बैतूल जिले के प्रभारी मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल की तस्वीर मंच पर लगे पोस्टर से नदारद थी।

 

*क्या बोले संबंधित लोग?*

इस चूक पर जब जनपद सीईओ संजीव श्रीवास्तव से पूछा गया तो उन्होंने कहा:

“पोस्टर समिति द्वारा फाइनल किया गया था। उस समय जनपद अध्यक्ष गणेश यादव भी मौजूद थे।”

 

*नगर पालिका अध्यक्ष नितिन गाडरे ने नाराजगी जताते हुए कहा:*

“अगर प्रभारी मंत्री का फोटो पोस्टर में नहीं है, तो यह बहुत बड़ी गलती है। इस पर जनपद सीईओ पर कार्यवाही होनी चाहिए।”

 

*जनपद अध्यक्ष गणेश यादव ने सफाई दी:*

“विभागीय मंत्री की तस्वीर पोस्टर में लगाई गई थी। जिला प्रभारी मंत्री की तस्वीर त्रुटिवश नहीं लग पाई। इसमें कोई खींचतान या पार्टी का मतभेद नहीं है, यह केवल भूल थी।”

 

*बीजेपी में अंदरूनी खींचतान?*

स्थानीय लोगों का कहना है कि जनपद अध्यक्ष बीजेपी से ताल्लुक रखते हैं, इसके बावजूद यह चूक पार्टी में आमला क्षेत्र में फुट की ओर इशारा कर रही है। आयोजन में प्रभारी मंत्री की उपस्थिति नहीं होना और फिर उनकी तस्वीर का न लगना, संयोग कम और साजिश ज़्यादा लग रहा है।

 

*अब क्या होगा?*

इस मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है और आयोजन समिति की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। उम्मीद की जा रही है कि इस गलती की उच्चस्तरीय जांच की मांग हो सकती है और इस मुद्दे पर आगे पार्टी के भीतर भी समीक्षा की जाएगी।

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