आपको और आपके सभी अहलो अयाल को ईदुल अज़हा की बेशुमार दिली मुबारकबाद।
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” सिराज ऐ मुनीर “
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Respected sisters and brothers,
अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह व बरकतुल्लाह।
” किसकी क़ुर्बानी “
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बेशक बनी आदम की ज़िंदगी में क़ुर्बानी से ज़्यादा बहतरीन दूसरा कोई अमल नही है;और इसलिए ही अल्लाह को प्यारी है,क़ुर्बानी। लेकिन क़ुर्बानी किस शै की होना चाहिए?
क़रीबी व दिल को प्यारी शै को फी सबीलिल्लाह वक्फ करना ही क़ुर्बानी (sacrifice) है। क़ुर्बानी व मोहब्बत का बेहद क़रीबी रिश्ता होना इब्राहीम अलैय अस्सलाम के वाकिया से भी ज़ाहिर होता है।
बनी आदम की ज़िंदगी में मुसलसल जिहादे अकबर व जिहादे असग़र की जद्दोजहद चलती रहती है।बनी आदम का अपनी नफसियाती ख्वाहिशात व दीगर शैतानी ऊमूर से जद्दोजहद जिहादे असग़र है। असल में बिना मुजाहिदना जज़्बे के क़ुर्बानी का अमल तकमिलियत इख्त्यार नहीं करता है।
बनी आदम नफसियाती व शैतानी ख्वाहिशात व आदात का ग़ुलाम होकर इनके नुक़सानी नताईज को जानने व समझने के बावजूद इनका आदी व दीवाना होकर इन्हें छोड़ने में पूरी तरह बेबस होकर कभी-कभी इनका लुकमा ऐ अजल भी हो जाता है। गोया बद ख्वाईशात व बद आदात बनी आदम के लिए क़रीबी व दिल को प्यारी शै का मुकाम हासिल कर लेती है।
बनी आदम को यौमे ईद ऐ क़ुर्बा के अज़ीम मौके पर जिहादे असग़र का अमल इख्त्यार करने का अज़्म कर क़रीबी व प्यारी लेकिन जान व ईमान की दुश्मन नफसियाती व शैतानी बद ख्वाहिशात व आदात की क़ुर्बानी का मुसलसल अमल इख्त्यार कर दीन व दुनिया की असल कामयाबी की सिरातल मुसतक़ीम को आसान व हमवार करने की दरकार है।
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आपको और आपके सभी अहलो अयाल को ईदुल अज़हा की बेशुमार दिली मुबारकबाद।
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Regards:Iqbal Khan Gauri,Retired District Judge,M.P.
Now:Law adviser and Human duties Activist,Ujjain.
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