मनुष्य जाति की सकारात्मक चिंतन व चरित्र से संस्कारित विचार व कर्म शैली से ही व्यक्तिगत, पारिवारिक व सामाजिक स्तर पर अमृत काल के अभ्युदय का मार्ग प्रशस्त होता है।
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” सकारात्मक चिंतन “
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आत्म अवलोकनार्थ।
सम्मानीय आत्मजन,
स्वस्थ,सुखद व सुरक्षित जीवन की प्रार्थना के साथ शुभ दिवस।
“मनुष्य जाति की मनमानी का मर्म “
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ईश्वरीय सत्ता ने मनुष्य जाति को विचार व कर्म की स्वतंत्रता प्रदान की है।मनुष्य जाति से यह अपेक्षा की जाती है कि धरती पर स्वर्ग का राज्य स्थापित करने या मनुष्य जाति की सभ्यता व संस्कृति के विकास व उन्नयन के मार्ग को प्रशस्त करने लिए इस वैचारिक व क्रियात्मक स्वतन्त्रता का प्रयोग न्याय व नीति के आदर्शों से संस्कारित व संचालित होना चाहिए।
मनुष्य जाति की विचार व कर्म शैली का प्रायोगिक प्रदर्शन इस कठोर व कड़वे यथार्थ को अनावरित करता है कि मनुष्य जाति ने मनुष्य सभ्यता की आरम्भिक अवस्था से ही इस वैचारिक व क्रियात्मक स्वतन्त्रता का दुरुपयोग करते हुऐ साम,दाम,दंड व भेद आधारित विचार व कर्म शैली को अपवादजन्य परिस्थितियों में अंगीकार करने के स्थान पर सामान्य विचार व कर्म शैली की भांति अंगीकार कर इस नकारात्मक विचार व कर्म शैली से प्रभावित कर्मों में न्याय व नीति का अभाव व कोई ईश्वरिय हस्तक्षेप न होने से ऐसे कर्मों के नकारात्मक प्रभावों ने मनुष्य जाति के जीवन को व्यक्तिगत,
पारिवारिक
व सामाजिक स्तर पर नारकीय बनाने के साथ ही धरती पर स्वर्ग का राज्य स्थापित होने की ईश्वरिय योजना में भी बाधक रहें हैं।
मनुष्य जाति की सकारात्मक चिंतन व चरित्र से संस्कारित विचार व कर्म शैली से ही व्यक्तिगत,
पारिवारिक
व सामाजिक स्तर पर अमृत काल के अभ्युदय का मार्ग प्रशस्त होता है।
अनंत ‘भारती ‘
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Regards:Iqbal Khan Gauri,
Retired District Judge,M.P.
Now:Law adviser and Human duties Activist,
Ujjain,M.P.
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