रतलाम में “ICT आधारित नवाचारात्मक शिक्षण की ओर एक कदम” विषय पर तीन दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। आईसीटी शिक्षकों के लिए केवल एक साधन नहीं है, बल्कि यह आज के युग की आवश्यकता है। इससे शिक्षा में नवाचार, सहभागिता, और समावेशिता को बढ़ावा मिलता है। – रिपोर्ट मनोहर मालवीय – किस्मत न्यूज

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रतलाम में “ICT आधारित नवाचारात्मक शिक्षण की ओर एक कदम” विषय पर तीन दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। आईसीटी शिक्षकों के लिए केवल एक साधन नहीं है, बल्कि यह आज के युग की आवश्यकता है। इससे शिक्षा में नवाचार, सहभागिता, और समावेशिता को बढ़ावा मिलता है। – रिपोर्ट मनोहर मालवीय

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शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय रतलाम में आयोजित “शिक्षण में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) का शिक्षण में प्रभावी उपयोग” पर केंद्रित तीन दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हुआ। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों को डिजिटल संसाधनों के सृजन, प्रस्तुतीकरण और मूल्यांकन की आधुनिक तकनीकों से सशक्त बनाना था।

 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री सी.एल. सालित्रा (एपीसी, रतलाम) ने अपने संबोधन में कहा:

 

आज के डिजिटल युग में शिक्षक की भूमिका केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि तकनीक के माध्यम से छात्रों को खोजी और व्यावहारिक रूप से सिखाने की जरूरत है। लगातार सिखना और उसका नियमित अभ्यास इस प्रशिक्षण की सार्थकता को सिद्ध कर पायेगा, ICT का उपयोग डिजिटल साक्षरता और तकनीकी शिक्षा, समावेशी शिक्षा, प्रोजेक्ट-आधारित शिक्षण , सतत विकास और पर्यावरणीय साक्षरता, समग्र शिक्षा, सक्षमता और जीवन कौशल आदि में किया जाये तो भविष्य की चुनितियों से लड़ा जा सकता हैं |

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्री अशोक लोढ़ा (एडीपीसी, रतलाम) ने कहा-

पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में आईसीटी (सूचना एवं संचार तकनीक) का प्रभाव अत्यंत क्रांतिकारी रहा है। पहले शिक्षण मुख्यतः पुस्तकों, ब्लैकबोर्ड और मौखिक व्याख्यान पर आधारित था, वहीं आज की शिक्षा स्मार्ट क्लास, ई-लर्निंग, डिजिटल कंटेंट और इंटरैक्टिव टूल्स से सुसज्जित हो चुकी है। पहले हमारे पास सीमित संसाधनों और पारंपरिक पद्धतियों पर निर्भरता, शिक्षक ही एकमात्र ज्ञान का स्रोत, शारीरिक रूप से उपस्थित होना अनिवार्य और मूल्यांकन की धीमी और एकतरफा प्रणाली थी जबकि वर्तमान में डिजिटल बोर्ड, प्रोजेक्टर, और स्मार्ट क्लास से शिक्षण अधिक प्रभावी ऑनलाइन पोर्टल्स से सामग्री सहज उपलब्ध हो जाती हैं |

ICT ने शिक्षण को केवल शिक्षक-केंद्रित न रखकर सीखने वाले-केंद्रित बना दिया है। इससे न केवल विद्यार्थियों की जिज्ञासा बढ़ी है, बल्कि सीखने की गति, गुणवत्ता और पहुंच भी व्यापक हुई है।

प्रशिक्षण प्रभारी श्री गोपाल वर्मा, प्राचार्य, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय धौंसवास ने अपने संबोधन में ICT प्रशिक्षण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षण प्रक्रिया को प्रभावशाली, रोचक और तकनीक-संपन्न बनाने के लिए सूचना एवं संचार तकनीक का ज्ञान अत्यावश्यक है।

उन्होंने बताया कि ICT न केवल शिक्षकों की शिक्षण क्षमता को बढ़ाता है, बल्कि छात्रों को भी वैश्विक स्तर की जानकारी, संसाधन और नवीनतम शैक्षणिक उपकरणों से जोड़ता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे DIKSHA, e-Pathshala, Google Classroom, आदि की जानकारी और उपयोग से छात्र कहीं भी, कभी भी सीख सकते हैं।

श्री वर्मा ने साइबर सुरक्षा की अनिवार्यता पर भी बल दिया, जिससे छात्र व शिक्षक डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रूप से कार्य कर सकें। उन्होंने कहा,

तीन दिवसीय प्रशिक्षण में मास्टर ट्रेनर्स मुकेश ठन्ना, स्वतंत्र श्रोत्रिय, ललित मेहता, रविप्रकाश मोदी, ऋतेश पंवार, तन्मय शर्मा, मनोज कुमार अहिरवार ने प्रति दिन ICT के विभिन्न टूल्स जैसे वर्चुअल लैब, आईसीटी एवं स्टीम, विज्ञान शिक्षण में गेमिफिकेशन, गूगल फॉर्म, गूगल शीट, सुरक्षित पासवर्ड प्रबंधन, ऑनलाइन डेटा की सुरक्षा, साइबर बुलिंग से बचाव, साइबर ग्रूमिंग, डिजिटल पेरेंटिंग, साइबर सुरक्षा, दो-चरणीय प्रमाणीकरण से परिचय करवाते हुए ICT का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।

कार्यक्रम का सञ्चालन डॉ ललित मेहता और कार्यक्रम का आभार मुकेश ठन्ना ने माना |

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