आखिरकार बरसात में सड़कों की खुदाई करके, ड्रैनेज लाईन डालने,केबल लाईन, पानी की लाईनें,गैस पाईप लाईन डालने का क्या खेल,,,। प्रमोद कुमार व्दिवेदी एड्वोकेट
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कभी सोचा है कि हमारे पुर्वज बरसात से पहले सचेत हो जातें थे, और अधिकांश निर्माण कार्य पहले पूरे कर लेते थे,,,कारण तकनीकी और आपदा से बचाव तथा धन की बचत।
पंरतु सरकारी अधिकारियों व्दारा इस समय किये जाने वाले कार्य क्या कहलायेंगे,,,।
सड़कें खुदी पड़ी है, पानी भराव कारण भी आवागमन बाधित हो रहा पंरतु ऐसे में भी सड़कों को खोदकर नवीन सड़क बनाई जा रही है,,, ड्रैनेज लाईन डाली जा रही,गैस लाईन, पानी लाईन भी,, क्यों,,,।
सोच समझ नहीं है क्या, बरसात में मिट्टी नम हो जाती है धंसने की सम्भावना भी रहतीं हैं पर पहाड़ खोदकर सुरंग बना रहे प्लास्टर कर रहे,,, सिमेट्री करण कर रहे।
गजब चल रहा,,।
इंदौर में अभी बदहाली चरम पर है क्यों
मुझे समझ में आया है कि खुब तकलीफ में आने दो जनता को और फिर जब निमार्ण कार्य होगा तो भले घटिया हो महत्व समझ विरोध नहीं होगा और आवश्यकता से अधिक बजट बढ़ेगा।
सरकारी नियम ही नहीं अपितु व्यवहारिक ज्ञान से हम सतर्क रहकर बरसात में सावधानी रखकर कार्य करते हैं अति आवश्यक होने पर ही खुदाई कार्य करते हैं परन्तु समझ नहीं आता आजकल निगम और सरकारी विभागों व्दारा बरसात समय,,,।
आम आदमी मरे तो मरे, तकलीफ में रहे तो रहे,,हम खेल करेंगे,,, जनता भी तो समझदार नहीं है कि खुलकर विरोध करें।
अभी आप शहर देखकर कहा सकते हो इंदौर में आना है तो साथ में बीमा करवाकर,, चिकित्सालय पता करके,,बंदर छलांग लगाने का गुण सीखकर तथा नाव भी लेकर आना है।
आपका स्वागत है हम तो आदतन है दुःख में भी भंडारा खाकर गुणगान करते हैं।
प्रमोद कुमार व्दिवेदी एड्वोकेट
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