बनी आदम का तर्जे अमल
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” फिक्र ऐ फहीम “
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Respected sisters and brothers,
अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह व बरकतुल्लाह।
” बनी आदम का तर्जे अमल “
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क्या आप इन कलमात से इत्तेफाक राय है कि जब कोई शख्स किसी दूसरे शख्स के हवाले से कोई शिकवा व
शिकायत करता है,
तब वह बनी आदम के उस तर्जे फिक्र व फैल का इनफिरादी तजुर्बा करता है,जो किताबों में दर्ज होने के साथ ही उसके आबा व अजदाद (ancestors) का तजुर्बा होने पर भी वह इन तजुर्बात से कोई सबक़ हासिल नहीं करता है?
इक़बाल “नूरानी “
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Regards:Iqbal Khan Gauri,
Retired District Judge,M.P.
Now:Law adviser and Human duties Activist,
Ujjain,M.P.
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