आज भी ये नायाब दस्तावेज़ जॉर्डन के किंग हुसैन मस्जिद के म्यूज़ियम में महफूज़ है। 📜
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यह वह मुबारक ख़त है जो हुज़ूर नबी करीम ﷺ ने रूम के बादशाह हेरक्लियस को भेजा था।
आज भी ये नायाब दस्तावेज़ जॉर्डन के किंग हुसैन मस्जिद के म्यूज़ियम में महफूज़ है। 📜
मुहम्मद सल्लल्लाहू अलैहि व सल्लम ने हरक़ल को जो ख़त भेजा था, उसके अल्फाज़ तारीख़ी किताबों में महफ़ूज़ हैं। यह ख़त मुख्तलिफ़ रिवायात में थोड़ी तब्दीली के साथ मिलता है, लेकिन इसका मज़मून और बुनियादी पैग़ाम एक जैसा ही है।
यहाँ उस ख़त के अल्फाज़ और उनका तर्जुमा पेश है:
ख़त के अरबी अल्फाज़:
بسم الله الرحمن الرحيم
من محمد عبد الله ورسوله إلى هرقل عظيم الروم.
سلام على من اتبع الهدى.
أما بعد، فإني أدعوك بدعاية الإسلام. أسلم تسلم، يؤتك الله أجرك مرتين.
وإن توليت فإن عليك إثم الأريسيين.
{يا أهل الكتاب تعالوا إلى كلمة سواء بيننا وبينكم ألا نعبد إلا الله ولا نشرك به شيئًا ولا يتخذ بعضنا بعضًا أربابًا من دون الله فإن تولوا فقولوا اشهدوا بأنا مسلمون}.
उर्दू तर्जुमा:
अल्लाह के नाम से जो निहायत मेहरबान, बहुत रहम करने वाला है।
अल्लाह के बंदे और उसके रसूल मुहम्मद की तरफ़ से, रूम के अज़ीम (बादशाह) हरक़ल के नाम।
उस पर सलामती हो जिसने हिदायत की पैरवी की।
इसके बाद (हम आपको पैग़ाम देते हैं) कि मैं तुम्हें इस्लाम की दावत देता हूँ। इस्लाम क़बूल करो, सलामत रहोगे और अल्लाह तुम्हें दोहरा अजर देगा।
और अगर तुमने इससे मुँह मोड़ा, तो तुम पर तमाम काश्तकारों (या तुम्हारी रियाया) का गुनाह होगा (यानी जो लोग तुम्हारी वजह से इस्लाम क़बूल नहीं करेंगे)।
(क़ुरआन की आयत):
“ऐ अहले-किताब (यहूदी और ईसाई)! ऐसी बात की तरफ़ आ जाओ जो हमारे और तुम्हारे दरमियान एक जैसी है, यह कि हम अल्लाह के सिवा किसी की इबादत न करें और उसके साथ किसी को शरीक न ठहराएँ, और हम में से कोई किसी को अल्लाह के सिवा रब न बनाए। फिर अगर वो (इस बात से) मुँह फेरें, तो कह दो कि गवाह रहना कि हम मुस्लिम (अल्लाह के फ़रमांबरदार) हैं।” (सूरह आले-इमरान, आयत 64)
आफताब आलम bombay. ✍️
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