श्री देवनारायण कावड़ यात्रा संघ प्रीतम नगर से उज्जैन के लिए रवाना रिपोर्ट मनोहर मालवीय
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प्रीतम नगर से उज्जैन महाकाल के लिए शनिवार सुबह आठ बजे 40.कावड़ियों का संघ प्रीतम नगर से उज्जैन महाकाल के लिए रवाना हुआ।
सुबह शिवमन्दिर पर सभी ने दर्शन कर 21.लीटर कावड़ के साथ गांव में भ्रमण कर,उज्जैन महाकाल के लिए पैदल ढोल धमाकों के साथ रवाना हुए,और सोमवार को सुबह महाकाल मंदिर में जलाभिषेक करेंगे
राहुल मालवीय,ने बताया की कावड़ यात्रा की शुरुआत भगवान शिव के प्रिय,माह सावन में आयोजित की जाती है। इस यात्रा में शिव भक्त कावड़ में जल भरकर पैदल चलते हैं और भगवान शिव की पूजा अर्चना करते हैं। नंदकिशोर मालवीय ने बताया कावड़ियों को नशीली चीजों से दूर रहना चाहिए और तामसिक भोजन नहीं करना चाहिए। कावड़ को जमीन पर नहीं रखना चाहिए अगर कहीं रुकना हो तो स्टैंड पर रखें। कांवड़ियों को जत्थे के साथ ही यात्रा करनी चाहिए। और मन, कर्म,वचन ,शुद्ध रखना चाहिए। निगम डामर ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव का जलाभिषेक सर्वप्रथम समुद्र मंथन के समय देवताओं द्वारा किया गया था। हलाहल विष पीने के बाद उनके दुष्प्रभाव को शांत करने के लिए देवताओं ने गंगाजल शिवजी पर अर्पित किया था। तब से यह परंपरा चली आ रही है। शिवलिंग पर शीतल जल विशेष रूप से गंगा या नर्मदा का जल चढ़ाया जाता है। इससे भक्तों को मानसिक और आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है। लोकेश टेलर ने बताया कि पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान परशुराम ने त्रेता युग में उत्तर प्रदेश के गढ़मुक्तेश्वर से गंगाजल लेकर पुरा महादेव बागपत में भगवान शिव का जलाभिषेक किया था। इसी आधार पर आज भी पूरे देश में शिव भक्त कावड़ यात्रा करते हैं। कई विद्वान भगवान परशुराम को दुनिया का पहला कावड़ यात्री मानते हैं। परंपरा को आगे बढ़ाते हुए। केशव सिसोदिया ने बताया कि शुद्ध जल से बाबा महाकाल का जलाभिषेक इस वर्ष 28 जुलाई को होगा और सभी भक्तों की श्रद्धा व सेवा से यह यात्रा हर वर्ष अधिक भव्य होती जा रही है। गोपाल गहलोत द्वारा बताया गया कि प्रीतम नगर से उज्जैन के लिए कावड़ यात्रा का यह दसवां वर्ष है।
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