श्रीकृष्ण की जन्म कथा में कथा पंडाल जयकारों से गूंज उठा – नंद के घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की. रीपोर्ट मनोहर मालवीय
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श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिवस का आयोजन अत्यंत भक्तिमय, भावपूर्ण एवं उल्लासपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या उपस्थित रही और सभी ने एकाग्रचित्त होकर कथा श्रवण किया।
कथा प्रवक्ता पूज्य श्री सुनीलकृष्ण जी व्यास (बेरछा वाले) ने अपने प्रेरक प्रवचन में कहा—
“श्रीमद् भागवत कथा मनुष्य को यह सिखाती है कि समाज में कैसे रहा जाए, कर्म कैसे किया जाए, जीवन कैसे जिया जाए और अंत में मृत्यु को भी कैसे सार्थक बनाया जाए।”
उन्होंने बताया कि भागवत केवल कथा नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन-शैली का मार्गदर्शन है।
तृतीय दिवस में वामन चरित्र कथा, श्रीराम कथा एवं श्रीकृष्ण जन्मकथा का भावपूर्ण वर्णन किया गया। श्रीराम कथा ने मर्यादा, त्याग और कर्तव्य का आदर्श प्रस्तुत किया।
विशेष आकर्षण के रूप में श्रीकृष्ण जन्म का अत्यंत मनोहारी वर्णन किया गया।
पूज्य व्यास जी ने बताया कि जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ गया, तब कारागार की अंधेरी रात में भगवान श्रीकृष्ण का अवतार हुआ। देवकी-वसुदेव के बंधनों का स्वयं खुल जाना, वासुदेव जी द्वारा बालकृष्ण को यमुना पार गोकुल पहुंचाना और आकाशवाणी का गूंजना—इन प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
इस दौरान विजय जी मंडोवरा वासुदेव के रूप में और मायरा पंकज जी धनोतीय (मोहन भोग, नागदा) श्रीकृष्ण के स्वरूप में विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। संपूर्ण कथा स्थल “नंद के आनंद भयो” के जयघोष से गूंज उठा।
कथा स्थल को सतीश जी गंगवाल द्वारा बनाई गई सुंदर एवं रंगीन रंगोली ने और भी भव्य बना दिया, जिसने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
चौथे दिवस की आरती एवं प्रसादी के यजमान
श्री शिवनारायण जी काला, सुपुत्र श्री दीपेश जी काला एवं समस्त काला परिवार रहे। यजमान परिवार द्वारा श्रद्धा भाव से आरती एवं प्रसादी का आयोजन किया गया। चौथे दिवस की कथा ने श्रद्धालुओं के हृदय में भक्ति, कर्म और विश्वास की गहरी छाप छोड़ी तथा संपूर्ण वातावरण श्रीकृष्णमय हो गया। श्रीमद् भागवत कथा में सभी नगरवासियों ने उपस्थित होकर धर्म लाभ प्राप्त किया उक्त जानकारी नगर के सामाजिक कार्यकर्ता सचिन भंडारी ने दी
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