जलियांवाला बाग हर भारतीय के दिल में बसता है जलियांवाला बाग अमृतसर शहर का वह बाग जहां इकठ्ठा हुए हजारों किसानों की भीड़ पर अंग्रेजों ने गोली चलवा दी थी  – किस्मत न्यूज

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जलियांवाला बाग हर भारतीय के दिल में बसता है जलियांवाला बाग अमृतसर शहर का वह बाग जहां इकठ्ठा हुए हजारों किसानों की भीड़ पर अंग्रेजों ने गोली चलवा दी थी 

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  • बैरिस्टर सैफुद्दीन किचलू 

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यह हजारों किसान अपने दो नेताओं की रिहाई की मांग कर रहे थे जिन्हें अंग्रेजों ने रोल्ट एक्ट का विरोध करने के कारण गिरफ्तार कर लिया था यह दोनों नेता थे अमृतसर के नगर आयुक्त बैरिस्टर सैफुद्दीन किचलू और सत्य पाल सिंह मलिक

 

आज बैरिस्टर सैफुद्दीन किचलू का जन्मदिन है वह 15 जनवरी 1888 को अमृतसर में पैदा हुए उनके वालिद अजीजुद्दीन किचलू कश्मीरी थे जो एक बड़े व्यापारी थे सैफुद्दीन किचलू की शिक्षा अमृतसर में ही हुई बाद में उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड चले गए कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में वह और जवाहरलाल नेहरू एक ही समय में शिक्षा प्राप्त कर रहे थे इंग्लैंड के बाद सैफुद्दीन किचलू जर्मनी गए और डाक्ट्रेट की डिग्री हासिल की 

 

सन् 1911 में जर्मनी से वापस आए और अमृतसर में वकालत शुरू की लेकिन बहुत जल्द वह स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े और पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए 1919 में जब वह मात्र 31 साल के थे उन्हें अमृतसर का नगर आयुक्त चुना गया 

 

सैफुद्दीन किचलू बहुत ही मालदार घराने से थे 1920 में इनकी जायदाद से जो किराया आता था वह एक लाख रुपए प्रतिमाह से अधिक था जो उस जमाने के हिसाब से एक बहुत बड़ी रकम थी लेकिन उन्होंने अपनी पूरी दौलत व जायदाद आजादी की लड़ाई में लुटा दी जब उनका इंतकाल हुआ तो रहने के लिए अपना एक घर तक न था 

 

वह अजीब शख्सियत के मालिक थे हर एक के काम आते थे चाहे उसकी विचारधारा कुछ भी हो 1924 में वह कांग्रेस के जनरल सेक्रेटरी चुने गए उन्होंने एक साथ ख़िलाफत तहरीक व कांग्रेस दोनों के महासचिव का पद संभाला , जब मुस्लिम लीग के दो टुकड़े हुए और मोहम्मद अली जिन्ना साहब अलग थलग पड़ गए यह उन्हें भी संभालने पहुंच गए और मुस्लिम लीग जिन्ना ग्रुप के जनरल सेक्रेटरी बनाए गए बाद में नेहरू रिपोर्ट पर उनका मोहम्मद अली जिन्ना साहब से इखतेलाफ हो गया और मुस्लिम लीग छोड़ दी 

 

उन्होंने सुना कि अल्लामा इक़बाल लाहौर में इलेक्शन लड़ रहे हैं और चुनाव में उनकी पोजीशन अच्छी नहीं है बगैर बुलाए उनके प्रचार में पहुंच गए 

 

वह आलिमे दीन नहीं थे फिर भी जमीअत उलमा ए हिंद के फाउंडर मेंबर थे , वह जमीअत के अरबाब में शामिल किए गए , जामिया मिल्लिया इस्लामिया के भी फाउंडर मेंबर थे , श्री शारदा पीठ के शंकराचार्य के विश्वासपात्र थे उनके साथ जेल में भी रह चुके थे , मास्टर तारा सिंह भी उन्हें बहुत पसंद करते थे , वामपंथियों से भी उनकी अच्छी निभती थी स्टालिन ने इनकी तारीफ़ की थी , भारतीय उपमहाद्वीप के वह पहले शख्स थे जिन्हें लेनिन पीस प्राइज से नवाजा गया था

 

कभी अली बिरदरान , गांधी , नेहरू , शेख अब्दुल्ला , मौलाना हुसैन अहमद मदनी जैसे लोगों के करीबी रहे सैफुद्दीन किचलू को आखिरी समय में सब ने तन्हा छोड़ दिया , बच्चे पाकिस्तान चले गए थे उन्होंनेे भारत में रहना पसंद किया 1963 में दिल्ली में उनका इंतकाल हुआ जामिया मिल्लिया इस्लामिया में दफ़न किए गए और जिस जामिया पर उन्होंने अपनी दौलत खर्च की थी उस जामिया के पास भी उन्हें देने के लिए कुछ न था

 

Khursheeid ahmad

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