चिचोली में गैस की भारी कालाबाजारी: होटलों पर घरेलू सिलेंडरों का खुलेआम उपयोग, जिम्मेदार मौन अकरम खान पटेल की रिपोर्ट
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चिचोली। नगर और आसपास के क्षेत्रों में इन दिनों रसोई गैस की कालाबाजारी अपने चरम पर है। एक ओर जहां आम उपभोक्ताओं को महीने भर से ज्यादा इंतजार करने के बाद भी गैस नसीब नहीं हो रही है, वहीं दूसरी ओर व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर घरेलू गैस सिलेंडरों का बेधड़क इस्तेमाल किया जा रहा है। खाद्य विभाग की निष्क्रियता के चलते कालाबाजारी करने वालों के हौसले बुलंद हैं।
होटलों और चाट की दुकानों पर घरेलू सिलेंडर का कब्जा
नगर के मुख्य बाजारों, चाय-पोहा के होटलों से लेकर चाट-फुल्की के ठेलों तक पर कमर्शियल सिलेंडरों की जगह घरेलू सिलेंडरों का उपयोग धड़ल्ले से हो रहा है। नियमों के मुताबिक व्यावसायिक उपयोग के लिए नीले रंग के कमर्शियल सिलेंडर का उपयोग अनिवार्य है, लेकिन लागत बचाने के चक्कर में संचालक घरेलू गैस का उपयोग कर रहे हैं।
1500 से 2000 रुपये में बिक रहा ‘ब्लैक’ में सिलेंडर
सूत्रों की मानें तो गैस की किल्लत का फायदा उठाकर बिचौलिए सक्रिय हो गए हैं। आम आदमी के हक की रसोई गैस को 1500 से लेकर 2000 रुपये तक की ऊँची कीमतों पर ब्लैक में बेचा जा रहा है। आर्थिक रूप से संपन्न लोग और होटल संचालक इसे आसानी से खरीद लेते हैं, जबकि मध्यम वर्गीय परिवार खाली सिलेंडर लेकर भटकने को मजबूर है।
नगरीय क्षेत्र में 45 दिन की वेटिंग, DAC के बाद भी इंतजार
हैरानी की बात यह है कि नगरीय क्षेत्र होने के बावजूद उपभोक्ताओं को सिलेंडर बुक करने के बाद 45-45 दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) आने के बावजूद एक-एक सप्ताह तक सिलेंडर की डिलीवरी नहीं दी जाती। जब भी एजेंसी पर संपर्क किया जाता है, तो स्टॉक की कमी का हवाला देकर पल्ला झाड़ लिया जाता है।
खाद्य विभाग की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
क्षेत्र में खुलेआम हो रही इस अनियमितता के बावजूद खाद्य विभाग और स्थानीय प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है। अधिकारियों की इस चुप्पी से आम नागरिकों में भारी आक्रोश है।
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