Baba farid ganj shakar ki jivni shiksha tapsya end mezik pura ullekh – किस्मत न्यूज

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Baba farid ganj shakar ki jivni shiksha tapsya end mezik pura ullekh

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बाबा फरीद जी की शिक्षा

इनके माताजी इस्लाम तालीम की अच्छी जानकारी थी घर में ही उन्होंने इन्हें 12 साल की उम्र में कुरान मजीद का अध्ययन करवा दिया इसी दौरान उन्होंने इन्हें तपस्या से सिद्धि प्राप्त करने का ज्ञान दिया इन्होंने तभी मन में ठान लिया था कि बड़े होकर तपस्या करके सिद्धियां प्राप्त करेंगे जब यह कुछ बड़े हुए तो 1 दिन तपस्या के लिए घर से निकल गए |बाबा फरीद जी का इतिहास 

बाबा फरीद जी द्वारा की गई तपस्या

 एक जंगल में जाकर तपस्या करने लगे सर्दी गर्मी सहकर जंगली फल खाए जब कोई फल नहीं मिला तो पेड़ों से पत्ते तोड़कर भी खाए थे फिर इन्होंने हठ-योग की तपस्या कि लगभग 12 साल की तपस्या के बाद एक दिन चिड़ियों की चहचहाहट इन्हें विचलित कर रही थी तो इन्होंने गुस्से में आकर कहा चिड़ियों मर जाओ वहां जितनी भी चिड़िया चचाहा रही थी एकाएक जमीन पर गिर कर मर गई उन्होंने देखा कि मेरे कहने मात्र से चिड़िया जमीन पर गिरकर मर गई है इन्हें एहसास हुआ कि मुझे सिद्धि प्राप्त हो गई है उन्होंने फिर से चिड़िया को देखा और बोले चिड़िया उड़ जाओ वहां जितनी भी चिड़िया जमीन पर गिरकर मर गई थी उनमें जान आ गई और वह अपने पंख फड़फड़ा कर उड़ गई इन्हें विश्वास हो गया कि इन्हें सिद्धि प्राप्त हो गई है वह सिद्ध हो गए हैं अहंकार में उनकी खुशी का ठिकाना न रहा अपनी खुशी को अपनी माता जी के साथ बांटने अपने घर अपने गांव की ओर चल दि

 

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