उत्तराखंड बनभूलपुरा जहां तक़रीबन 90% मुसलमान और 10% हिंदुओ की आबादी बस्ती है, इस एरिया में सब के मकान तोड़ने का हुकुम सादिर हो चुका है, मस्जिद मन्दिर सब तोड़े जायेगे। कुछ नादान अब भी कहेंगे नया साल मुबारक, क्या करे ऐसे साल का जब किसी के सर से छत छीनी जा रही हो, ये है नये साल के तोहफ़ा? जिस मुल्क के 4000 परिवार सड़क पर अपनी बका की लड़ाई लड़ रहे हो, वहा क्या नया साल ओर किया पुराना साल #JusticeForBanbhoolpura – किस्मत न्यूज

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उत्तराखंड बनभूलपुरा जहां तक़रीबन 90% मुसलमान और 10% हिंदुओ की आबादी बस्ती है, इस एरिया में सब के मकान तोड़ने का हुकुम सादिर हो चुका है, मस्जिद मन्दिर सब तोड़े जायेगे। कुछ नादान अब भी कहेंगे नया साल मुबारक, क्या करे ऐसे साल का जब किसी के सर से छत छीनी जा रही हो, ये है नये साल के तोहफ़ा? जिस मुल्क के 4000 परिवार सड़क पर अपनी बका की लड़ाई लड़ रहे हो, वहा क्या नया साल ओर किया पुराना साल #JusticeForBanbhoolpura

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🚨🚨 *हलद्वानी (उत्तराखंड) के 20-25 हजार मुसलमानों के लिए दुआ कीजिये*

 

 

 

 

 

 

*बेहद संगीन मामला:*

 

 

इधर पूरी दुनिया (और मुसलमान भी) नए साल का इस्तक़बाल करने की तैयारी कर रहे है उधर उत्तराखंड के एक कस्बे हलद्वानी में प्रशासन रेलवे की ज़मीन को अतिक्रमण मुक्त करने के बहाने से तकरीबन 4500 हर तोड़ने की तैयारी कर रहा है।

 

 

ये बस्ती, जिसे रेलवे अपनी बता कर हाईकोर्ट से केस जीत चुका है, एक मुस्लिम आबादी है। 8 से ज़्यादा मस्जिदे और 20 से ज़्यादा स्कूल के साथ 4500 घर जिनमे तकरीबन 20 से 25 हजार लोग आबाद है। 

 

लोकल एडमिनिस्ट्रेशन इस इलाके को पूरा मैदान बनाने के लिए कौशां है। घर खाली करके लोगो को इलाका खाली करने की मुनादी की जा चुकी है। आसपास के शहरों से एक्स्ट्रा पुलिस फोर्स बुला लिया गया है। पुलिस इलाके को चारों तरफ से घेर कर “हुक्म मिलने” के इंतज़ार में बैठी है। 

 

बिजली विभाग ने इतने बड़े इलाके की सप्लाई यकदम काटने की प्रेक्टिस कर ली है। हत्ता के लोकल एडमिनिस्ट्रेशन को इसमें होने वाले खर्च का एस्टीमेट भी थमा दिया है।

 

*और सबसे ज़्यादा ध्यान देने वाली बात ये की आज़ादी के बाद शायद ये हिंदुस्तानी तारीख में पहली बार इतना बड़ा ईनक्रोचमेंट हो रहा है, मगर मेनस्ट्रीम मीडिया में खबर सिरे से गायब है।* जबकि मुसलमानों की बर्बादी के किस्से तो मीडिया बढ़ा चढ़ा कर पेश करता है, ताकि इस “सड़े हुए समाज” के कलेजे को ठंडक पहुचाई जा सके और “हृदयसम्राट” जो “खोपड़ियों की दीवार” बना रहे है उसमें एक और खोपड़ी जड़ती हुई दिखाई जाए.. 

 

और तमाम आबादी उत्तराखंड की कंपा देने वाली ठंड में दिन-रात हताश और बेबस घरों के बाहर धरने-प्रदर्शन करके प्रशासन से राहत मिलने की उम्मीद लिए बैठे है।

 

 

बूढ़े बेबसी की सिसकियां ले रहे है तो जवान चेहरों पर ? लिए घूम रहे है कि “अब क्या होगा” 

 

ज़ुल्म दिन ब दिन अपनी इंतेहा को पहुच रहा है। बातिल तमामतर कोशिशें कर रहा है कि मुसलमानो को पस्ती की तहो तक पहुंचा दें.. 

 

 

*अल्लाह हम हिंदी मुसलमानों पर रहम फरमाये.. ख़ुसूसन हलद्वानी के मुसलमानों की अबादकारी के असबाब मुहैया करें। उनके लिए आसानी फरमाये। इस ज़ुल्म का बेहतरीन बदल इस दुनिया मे भी और आख़ेरत में भी अता करें।*

 

 

आमीन

 

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