आज फिर लाया हू एक जांबाज देशभक्त मुहम्मद अली जोहर की जीवनी लिखने को तो उनकी जिंदगी का हर दिन एक किताब है , देश को और देश की स्वतंत्रता को समर्पित । अफसोस हमने ऐसे ऐसे वीरों को एक डाक टिकट बना कर दीवारों से लगा दिया है । – किस्मत न्यूज

किस्मत न्यूज

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आज फिर लाया हू एक जांबाज देशभक्त मुहम्मद अली जोहर की जीवनी लिखने को तो उनकी जिंदगी का हर दिन एक किताब है , देश को और देश की स्वतंत्रता को समर्पित । अफसोस हमने ऐसे ऐसे वीरों को एक डाक टिकट बना कर दीवारों से लगा दिया है ।

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दौरे हयात आएगी, क़ातिल तेरी क़ज़ा के बाद …

है , इब्तदा हमारी, तेरी इंतहा के बाद …

 

Life will begin again, when the tyrant has been vanquished. It will be our beginnings when you have reached your limits.

 

 कविता के यह स्वर्ण शब्द स्वतंत्रता सेनानी वीर मोहम्मद अली जौहर के हैं । जो हर युग के ज़ालिम, अहंकारी, हकूमत के लिए चुनौती है । यह तब भी उतना ही प्रभावी था और अब भी , और आगे भी …

 

वीर मोहम्मद अली के पूर्वज 200 मौलवी UP के नजीबाबाद से दिल्ली वीर स्वतन्त्रता सेनानी बहादुर शाह जफर के साथ ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ युद्ध लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे । 

 

मोहम्मद अली जब 5 वर्ष के थे तभी पिता का साया सर से उठ गया था । परवरिश की जिम्मेदारी वीर स्वतंत्रता सेनानी मां आब्दी बेगम ( बी अम्मा ) पर आ गई । 

 

बी अम्मां ने अपने दोनों बेटों मोहमद अली, शौकत अली को उच्च शिक्षा दिलाया , और स्वतंत्रता का मजबूत और अभेद सिपाही बनाया । बी अम्मां का मानना था कि बर्तानिया से मकाबले के लिए अंग्रेजी शिक्षा और नीति की जानकारी जरूरी है । शिक्षा से ही उसकी कमजोरियों का पता लगा कर प्रहार किया जा सकता है और जीत हासिल की जा सकती है । अन्य शिक्षा के साथ इस्लामी शिक्षा में भी दोनों भाई निपुण थे ।

 

वह एक बेख़ौफ़ लीडर , बेबाक सहाफी, अजीम चिंतक और देशप्रेमी, बे मिसाल स्वतन्त्रता सेनानी थे । जिसने अंग्रेजी के खिलाफ कलम और तलवार में से कलम को चुना और अंग्रेजों की नींव हिला दी ।

 

वह भिन्न पत्रिकाओं में अंग्रेजों की जालमान नीतियों के खिलाफ खुल कर लिखते औए विरोध व्यक्त करते । अपने लेख और तकरीरों से देश के जवानों को आज़ादी की ललक जगाते और आज़ादी की कीमत बताते । अपनी शायरी में वीरगति और वीरता को सलाम पेश करते …

अंग्रेज हकूमत उनकी लेखनी और गतिविधियों से डर कर बार बार जेल भेज देती लेकिन वह बिना डरे अंग्रेजों के खिलाफ बोलते और लिखते रहे । 

 

अंतिम वर्षों में जब वह जेल की सख्तियां काट रहे थे, उनकी छोटी बेटी जो 21 वर्ष की थी जिसे वह बहुत प्यार करते थे सख्त बीमार पड़ गई । घर से खत आया कि अंग्रेजों की श%

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