देश में आर्थिक कारणों से आत्म हत्याओं का बड़ता आकड़ा आर्थिक विकास के दावों को खोखला साबित करने के साथ ही समाज के उदार व मानवतावादी बुद्धि जीवियों के लिए चिंतन व सक्रियता का विषय होना चाहिए। सम्यक् “भारती “
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