वाकिफ नहीं जो लोग सफर के उसूल से
साए कि भीक़ मांग रहे हैं बबूल से,
क्या जाने तू के केसे गुज़र ती है जिंदगी
केफे मलाल पुछ किसी दिल मलुल से,
मैं आज तक सफर में हूं इस एतेमाद पर
उभरे गी मंजिलें मेरे कदमों की धूल से…
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