भारतीय सिनेमा का उन्नत भविष्य उसके रचनात्मक निर्देशन से नहीं वरन् सामाजिक प्रेरक विषय से ही संभव – डॉ. भरत शर्मा* मुंबई सहारा /ब्यूरो
|
😊 Please Share This News 😊
|
उक्त वक्तव्य संस्कृति मंत्रालय,
भारत सरकार- सदस्य डॉ भरत शर्मा ने फ़िल्मी निर्देशकों और निर्माता की मुंबई की होटल सहारा स्टार में आयोजित संगोष्ठी में कहे । आपने कहा कि आज की तकनीकी युग फ़िल्मों में चलचित्रांकन और एनीमेशन का स्तर वाक़ई काफ़ी उन्नत हो गया है पर फ़िल्मों के विषय चयन में समाज को संदेश देने का दृष्टिकोण स्तरहीन ही चला है । फूहड़ता और अश्लीलता परोसने का यह चलन भारतीय संस्कृति के लिए ठीक नहीं। आपने संगोष्ठी में उपस्थित निर्माता, निर्देशक और कहानीकार से अनुरोध किया कि आज सपरिवार देखे जानेवाली फ़िल्मों की कमी को आप सब पूरा करें और अपनी कहानी के चयन में सामाजिक संदेश देने की गुंजाइश ज़रूर रखें ।
डॉ भरत शर्मा का स्वागत जर्मनी से आये निर्देशक वी. के. सिंह ने किया । आप इंडोजर्मन कोलैबोरेशन के प्रणेता है और यूके में भारतीय फ़िल्मकार के सहायक के रूप में जाने जाते है ।
कार्यक्रम में वरिष्ठ फ़िल्म निर्माता – निर्देशक जवाहरलाल, कुमार मोहन, भूपी सचदेव, कमल मुकट, अमजद क़ुरैशी, हरीश जायसवाल, शैलेंद्र शुक्ला, सुधांशु शर्मा, धर्मेश मेहता, अभिषेक शर्मा और फ़िल्म लेखक संदीप नाथ, स्वानन्द किरकिरे, उभरते कलाकार विशाल मोहन आदि आमंत्रित थे। कार्यक्रम में नेपाल से आये उद्योगपति शिरीष मुरारका, कलकत्ता से आशीष धन्धातिया, मुंबई से सुषमा शर्मा, पूनम सिंह, सुश्री लता, सुश्री पूनम, अभिषेक सिंह, साहित्य शर्मा और मध्यप्रदेश से रवि बाहेती, आदि भी विशेष रूप से मौजूद रहे ।
|
व्हाट्सप्प आइकान को दबा कर इस खबर को शेयर जरूर करें |

