> **”फिक्र-ए-फहीम” — एक सोच, जो इंसानियत से शुरू होकर तौहीद तक जाती है। “ला इलाह इल्लल्लाह” — सच्चा पैग़ाम, सीधी राह। ✍️ Iqbal Khan Gauri (Retd. Judge, M.P.) – किस्मत न्यूज

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> **”फिक्र-ए-फहीम” — एक सोच, जो इंसानियत से शुरू होकर तौहीद तक जाती है। “ला इलाह इल्लल्लाह” — सच्चा पैग़ाम, सीधी राह। ✍️ Iqbal Khan Gauri (Retd. Judge, M.P.)

इक़बाल खान गोरी

Justice

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🌙 फिक्र-ए-फहीम

 

“ला इलाह इल्लल्लाह की सदा का असल पैग़ाम”

 

📢 Respected sisters and brothers,

अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह व बरकतुल्लाह।

 

क्या आप इस बात से इत्तेफ़ाक रखते हैं कि

इस्लाम का पहला और सबसे अहम सुतून — “तौहीद” —

उस कलिमा-ए-तय्यिबा पर क़ायम है:

“ला ईलाह इल्लल्लाह”

जिसकी बुनियाद ही वहदानियत (एकेश्वरवाद) है, और जो हर इंसान को इंसानियत परस्ती की सीधी राह की दावत देता है।

 

📖 यही वह अल्लाह की तालीम है जो नस्ल-ए-आदम को जोड़ती है, तोड़ती नहीं।

यही वह सदाय-ए-हक़ है जो हरेक दिल तक पहुँचना चाहिए — तअल्लुक़, तहज़ीब और तौहीद के साथ।

 

🕊️ यही फिक्र-ए-फहीम है, यही पैग़ाम-ए-अस्ल।

 

 

 

✍️ इक़बाल “नूरानी”

Retired District Judge, M.P.

Now: Law Adviser & Human Duties Activist — Ujjain, M.P.

 

🤲🌹 मोहब्बत, इंसाफ़ और वहदानियत का परचम बुलंद रहे…

 

 

 

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> **”फिक्र-ए-फहीम” —

एक सोच, जो इंसानियत से शुरू होकर तौहीद तक जाती है।

“ला इलाह इल्लल्लाह” — सच्चा पैग़ाम, सीधी राह।

 

✍️ Iqbal Khan Gauri (Retd. Judge, M.P.)इक़बाल खान गोरी

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