उज्जैन महापौर चुनाव *शानू चिश्ती* की रिपोर्ट खुद कांग्रेस के नेताओ ने महेश परमार को पूरा समर्थन ना देके हराया
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उज्जैन में कांग्रेस ने ही कांग्रेस को हराया
भाजपा प्रत्याशी मुकेश टटवाल 736 मतों से जीते,,,, वही 2225 ने नोटा का विकल्प चुना,,,याने उज्जैन में इतने मतदाताओं ने माना की इनमें से कोई भी महापौर प्रत्याशी हमारा नेता बनने लायक नहीं,,,उज्जैन के इतिहास में अभी तक हुए महापौर पद के लिए चुनाव में सबसे कम जीत हार का अंतर इस बार 2022 का रहा है, यहां पर विश्लेषण में हमने पाया कि कांग्रेस को खुद कांग्रेस ने हीं हराया है,इस बार भाजपा के बस की बात नहीं थी की अपने महापौर को जीता लाए कांग्रेस के महापौर प्रत्याशी शहर के बाहर से थे,जो वर्तमान में उज्जैन जिले के तराना से विधायक भी है सूत्रों की माने तो कांग्रेस के स्थानीय वरिष्ठ नेता यह नहीं चाहते थे, कि विधायक भी वहीं है,, अब कमलनाथ जी ने महापौर का टिकट भी उन्हें दे दिया,,, अगर यह जीत गए तो हो सकता है, सांसद का टिकट भी महेश परमार को कमलनाथ दिलवा दें,, ऐसे में हमारा क्या होगा,,, ? आखिरकार निपटा ही दिया,, चुनावी प्रचार के दौरान हमने शहर के 54 वार्डों में स्थिति का जायजा लिया था,,, इस दौरान कांग्रेस महापौर प्रत्याशी अकेले ही क़िला लड़ाते नजर आए, कांग्रेस के वरिष्ठ इक्का-दुक्का मौके छोड़ दे तो चुनाव प्रचार में कहीं भी उनके साथ नजर नहीं आए,, वही भाजपा महापौर प्रत्याशी के जनसंपर्क में मंत्री, सांसद, विधायक से लेकर तमाम भाजपाई ने पूरी ताकत लगा दी थी,,, तब भी जीत का अंतर 736,,,साफ है कांग्रेसी अगर अपनी परंपरा नहीं निभाते तो यहां पर निश्चित रूप से कहानी कुछ और भी हो सकती थी,,, परंतु परंपरा निभाना भी जरूरी था,,,कांग्रेस को कांग्रेस ने हराया,,, इस बार भाजपा के बस की बात नहीं थी कि अपना महापौर शहर में बना पाए,,,
54 वाडो में से 16 वार्डों में कांग्रेस के पार्षद जीते,,बाकी शेष सभी सीटों पर कमल खिला, ईसकेबाद भी महेशजी का अंतर ईतना कम रहा ।
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