महात्मा गांधी जिला चिकित्सालय मे क्या अयोग्य,आलसी,लापरवाह और कमिशनखोर डॉक्टर ही नियुक्त हैं?। देवास जिले से जिला चिकित्सालय आने वाले ग्रामीणों और गरीबों को इन्दौर भेजने का रहस्य क्या है? पत्रकार इकबाल शेख़ की रिपोर्ट – किस्मत न्यूज

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महात्मा गांधी जिला चिकित्सालय मे क्या अयोग्य,आलसी,लापरवाह और कमिशनखोर डॉक्टर ही नियुक्त हैं?। देवास जिले से जिला चिकित्सालय आने वाले ग्रामीणों और गरीबों को इन्दौर भेजने का रहस्य क्या है? पत्रकार इकबाल शेख़ की रिपोर्ट

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बेटी  की डिलीवरी के लिए परेशान होते पत्रकार इकबाल शैख रायसिंह सेंधव सोनकच्छ पत्रकारों के परिवार को भी नहीं मिल रही स्वास्थ्य विभाग में सुविधा सोनकच्छ के पत्रकार इकबाल शेख से प्राप्त जानकारी केअनुसार राजनीति को वेशे तो पत्रकारों को चौथा स्तंभ माना जाता है लेकिन पत्रकार के परिवार को भी स्वास्थ्य केंद्र पर सुविधा नहीं मिलना एक आश्चर्य का विषय है प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ बहना योजना शहीत नारी सम्मान के लिए आनेक योजना संचालित की जा रही है लेकिन उनके घुमानदे स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी द्वारा मुख्यमंत्री महोदय के आदेश को अनदेखा किया जा रहा हे *महात्मा गांधी जिला चिकित्सालय मे क्या अयोग्य,आलसी,लापरवाह और कमिशनखोर डॉक्टर ही नियुक्त हैं?। देवास जिले से जिला चिकित्सालय आने वाले ग्रामीणों और गरीबों को इन्दौर भेजने का रहस्य क्या है?। ग्रामीण गर्भवतियों के परिजनों से अवैध वसूली किया जा रहा है वसूली की राशि नहीं देने पर डॉटर द्वारा परिजनों को इन्दौर भेजने का बहाना बनाया जा रहा है जो प्रस्तुता के साथ सीधा खिलवाड़ है खिलवाड़ है और इसके लिए प्रशासनिक अमले सहित अस्पताल प्रबंधन और जनप्रतिनिधि भी जिम्मेदार है। करोड़ों के कायाकल्प और सौ से अधिक जांच सुविधाओं का प्रचार नौटंकी और गुमराह करने वाला है ।मीडिया मे प्रकाशित और प्रसारित लापरवाही ,अव्यवस्थाओं ,व अवैध वसूली की खबरों पर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के सख्त निर्देश के बावजूद ध्यान नहीं दिया जाता ।आखिर इन्दौर के एम व्हाय सहित देवास के निजी अस्पतालों मे मरीजो को यहां वहां अमलतास भेज दिया जाता है ।कारण स्पष्ट है दलाली और कमीशन का खेल । सोनकच्छ के एक पत्रकार इकबाल खान की बेटी को वह 21 जून को इस लिए डिलेवरी के लिए लाए कि यहां बेहतर इलाज होगा लेकिन रात भर से परेशान होकर सुबह परिचितों को फोन लगाकर कह रहे हैं बहुत अव्यवस्थाऐं हैं ।कोई ध्यान ही नहीं दे रहा है ।सीएमएचओ को फोन उठाने की फुरसत नहीं है ।नर्सों द्रा इन्दौर या निजी अस्पताल जाने को कहा जा रहा है,आखिर क्यों ?।जिला अस्पताल प्रबंधन और सुव्यवस्थाओं की नींद कब खुलेगी?/सेवा और सुव्यवस्थाओं के दर्शन कब होंगे?,ग्रामीणों और गरीबों को उचित इलाज कब मिलेगा

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