निर्मल मन ही मनमोहन”
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“सकारात्मक चिंतन “
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आत्म अवलोकनार्थ।
सम्मानीय आत्मजन,
शुभ दिवस ।
“निर्मल मन ही मनमोहन”
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सकारात्मक व स्वस्तिक विचार व कर्म से परिष्कृत व संस्कारित निर्मल व सहज मनुष्य मन व हृदय ही व्यक्तिगत,पारिवारिक व सामाजिक स्तर पर सदभाव,सहयोग,
सहिष्णुता, सह-अस्तित्व,समृद्धि, सुखानंद व उन्नयन के अमृतकाल (स्वर्ण काल) का निर्माण करता है।
अज्ञात “भारती “
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Regards:Iqbal Khan Gauri,Retired District Judge,M.P.
Now:Law adviser & Human duties Activist,Ujjain.
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