उम्मीद कर रहा हु कि ज्यूडिशियरी प्रिंसिपल ऑफ नेचुरल जस्टिस के सिद्धांत का पालन करते हुए न्याय करेगी।शेख अलीम एडवोकेट
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अपने अल्पसंख्यक विभाग के लीगल सेल के एडवोकेट साथियों के साथ महू के हालात जानने के लिए महू का दौरा किया। वहां महू के अल्पसंख्यक पीड़ितों और शहर काजी से मिलकर हालात का जायजा लिया उसके बाद से वहां थाने जाकर पुलिस अधिकारियों से भी बात की तो पता चला कि पुलिस प्रशासन एकतरफा कार्यवाही कर रही है। पीड़ित अल्पसंख्यक थाने में आवेदन दे रहा है तो पुलिस अपराध पंजीबद्ध नहीं कर रही है, पीड़ित इंसाफ के लिए थाने में जा रहा है तो उसकी बात नहीं सुनी जा रही है उसके विरुद्ध ही अपराध पंजीबद्ध किया जा रहा है। अपलसंख्यकों के खिलाफ ही पुलिस के द्वारा कार्यवाही की जा रही है। ये हालात देखकर तकलीफ हुई। प्रशासन का इस तरह का कार्य प्रिंसिपल ऑफ नेचुरल जस्टिस के खिलाफ है। हम इसके लिए पुलिस के आला अधिकारियों को अभ्यावेदन देकर हालात के बारे में बताएंगे। अगर पुलिस के आला अधिकारी भी इसका संज्ञान नहीं लेंगे तो हम high court में याचिका दाखिल करके महू के लोगों को इंसाफ दिलाने की कोशिश करेंगें। हमारी टीम में एडवोकेट इकराम अंसारी, एडवोकेट इम्तियाज मंसूरी, एडवोकेट साजिद खान, एडवोकेट आरिफ मंसूरी, एडवोकेट अजीम खान, सुबूर गौरी, जाहिद मुल्तानी, थे हम सब मिलकर कोशिश कर रहे है उम्मीद कर रहा हु कि ज्यूडिशियरी प्रिंसिपल ऑफ नेचुरल जस्टिस के सिद्धांत का पालन करते हुए न्याय करेगी।शेख अलीम एडवोकेट
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