मनुष्य अपने चरित्र से समाज में पहचान व मान्यता प्राप्त करता है। अज्ञात भारती।।।।Regards:Iqbal Khan Gauri,Retired District Judge,M.P. Now:Law adviser and Human duties Activist,Ujjain. 🙏🙏🫂🫂🤝🤝❤️❤️
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” अकाट्य सत्य “
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आत्म अवलोकनार्थ।
सम्मानीय आत्मजन,
शुभ दिवस।
जब किसी मनुष्य को अन्य मनुष्य (चाहे वह निकटस्थ या दूरस्थ, परिचित या अपरिचित या रिश्तेदार या पड़ोसी हो) के दुःख व कष्ट से आंतरिक भावात्मक सुख,संतोष व संतुष्टि की अनुभूति के स्थान पर दुःख,कष्ट व संवेदना की अनुभूति होती है,अर्थात समानुभूति (empathy) का भाव रखता है, तब वह सकारात्मकता के मार्ग पर होकर लौकिक व पारलौकिक सार्थक सफलता प्राप्त करता है।
अज्ञात “भारती “
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Regards:Iqbal Khan Gauri,Retired District Judge,M.P.
Now:Law adviser and Human duties Activist,Ujjain.
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” सकारात्मक चिंतन ”
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आत्म अवलोकनार्थ।
सम्मानीय आत्मजन,
शुभ दिवस।
” व्यक्तित्व विकास का मर्म ”
(1)मनुष्य अपने चरित्र से समाज में पहचान व मान्यता प्राप्त करता है।
(2)मनुष्य की वैचारिक व क्रियात्मक अभिव्यक्ति से ही उसके चरित्र का अनावरण होता है,जो सकारात्मक या नकारात्मक या
मध्यमी होता है।
(3)मनुष्य जीवन में व्यक्तिगत,पारिवारिक व सामाजिक स्तर पर चुनौतियों व संघर्ष से ही मनुष्य सभ्यता व संस्कृति के विकास व उन्नयन का मार्ग प्रशस्त होता है।
(4)मनुष्य जीवन में स्वयं के प्रति सकारात्मक मित्रतापूर्ण जीवन शैली के अभाव में पारिवारिक व सामाजिक स्तर पर सकारात्मक मित्रतापूर्ण जीवन शैली के निर्माण के अभाव में उक्त तीनों ही स्तरों पर अमृत काल का निर्माण नहीं होता है।
(5)मनुष्य अपनी प्रकृति,प्रवृत्ति,शिक्षण,
प्रशिक्षण व पर्यावरण के अनुसार अपने विचारों,भावनाओं,
संवेदनाओं व प्रतिक्रियाओं को अभिव्यक्ति प्रदान करता है।इस प्रक्रिया में उचित शिक्षण व प्रशिक्षण के अभाव में 80% मामलों में उक्त अभिव्यक्तियों को सकारात्मक दिशा प्राप्त न होने से व्यक्तिगत,पारिवारिक व सामाजिक स्तर पर अपूर्णीय क्षति की परिस्थितियां उपस्थित होती हैं।
अवचेतन “भारती ”
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Regards:Iqbal Khan Gauri,Retired District Judge,M.P .
Now:Law adviser and Human duties Activist,Ujjain.
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