लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में जब चुनावी राजनीति राजनीतिक दलों के मर्यादाहीन होने से पंथगत साम्प्रदायिकता, जातिवाद,आर्थिक भ्रष्टाचार व आपराधिकता से ग्रस्त होती है,तब स्वस्थ व सुदृढ़ लोकतंत्र का निर्माण नहीं होता है। न्याय ” भारती “
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