हुनर कभी हारने नहीं देता है। जियो और जीने दो,,,, जीवन की नवीन शुरुआत।।
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” सिराज ऐ मुनीर ”
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Respected sisters and brothers,
अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह व बरकतुल्लाह।
” ख़ूदी को कर बुलंद इतना कि ”
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अगर बनी आदम अपनी शर्तों पर ज़िंदगी जीना चाहता है,तो उसे अपनी क़ुदरती क़ाबलियत व सलाहियत को पहचान कर ताउम्र तराशकर हरेक मामलात में सौ फीसदी सई व कोशिश की दरकार है।
इस नज़रिया के हवाले से ही मुमताज़ शायर व मुफक्किर अल्लामा इक़बाल ने फरमाया है:
ख़ूदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ूद पूंछे, बता तेरी रज़ा क्या है।
इक़बाल ” नूरानी ”
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Regards:Iqbal Khan Gauri,Retired District Judge,M.P.
Now:Law adviser and Human duties Activist,Ujjain.
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