बस स्टैंड का भवन चकाचक, पर बुनियादी सुविधाओं का है अभाव बातें महिलाओं के उत्थान की, बस स्टैंड पर महिला शौचालय में लगा रहता हैं ताला, महिला होती रहती हैं परेशान… घोंसला – किस्मत न्यूज

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बस स्टैंड का भवन चकाचक, पर बुनियादी सुविधाओं का है अभाव बातें महिलाओं के उत्थान की, बस स्टैंड पर महिला शौचालय में लगा रहता हैं ताला, महिला होती रहती हैं परेशान… घोंसला

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एक और जहां प्रदेश के मुखिया महिलाओं, बालिकाओं के उत्थान के लिए नित नई योजनाएं बना रही है वही दूसरी ओर महिदपुर तहसील के गांव घोंसला में यात्रियों तथा वाहन चालकों की सुविधा हेतु करोड़ों रुपए खर्च कर मुख्य चौराहे के पास नवीन बस स्टैंड पंडित दीनदयाल उपाध्याय का निर्माण किया गया।इस बस स्टैंड के निर्माण में करोड़ों रुपए खर्च हुए हैं। बस स्टैंड का भवन चकाचक है लेकिन इसमें बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है।देखा जाए तो नवनिर्मित बस स्टैंड में शौचालय बना है लेकिन चालू नहीं हुआ है। महिला शौचालय का इंतजाम भी नहीं है इंदौर से कोटा, राजस्थान , जावरा, ताल, आगर, उज्जैन यहा से बसो का आवागमन लगा रहता है। दूर दराज और लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है । खासकर महिला यात्रियों को काफी परेशानी होती है।

 

*इस भीषण गर्मी में पानी पीने का अभाव*

 

ग्राम पंचायत द्वारा अब तक यात्रियों के लिए पानी के नल भी नहीं लगाए गए हैं। जबकि नल कनेक्शन करके बस स्टैंड पर पानी की टंकी रखवा दी गई थी लेकिन बिना रख रखाव के गायब हो गई। जबकि ग्रामीण द्वारा पानी के मटके रखे हुए हैं उसके बावजूद आसपास पान, गुटखा खाने वाले यात्रियों के कारण गंदगी ही गंदगी नजर आ रही है। इस गंदगी को देख प्यासा व्यक्ति बिना पानी पीए ही लौट जाता है। यात्रियों ने बताया कि ग्राम पंचायत को बस स्टैंड परिषर में साफ-सफाई करना चाहिए। इस दौरान यदि यात्री गंदगी फैलाते है तो प्रशासन द्वारा दंडात्मक कार्यवाही करना चाहिए।

 

*सप्ताह में दो बार लगते हैं हाट बाजार*

 

यहाँ सप्ताह में दो बार हाट बाजार प्रति सोमवार मवेशी हाट व प्रति बुधवार को दैनिक वस्तुओं का हाट संचालन किया जाता हैं, जिसमे आसपास के ग्रामों व अन्य जिलों के व्यापारी एवं ग्रामीण आते हैं इसके बावजूद इसके सार्वजनिक शौचालय पर ताला लटकाकर महिलाओं के लिये मजबूरी पैदा कर दी गई हैं महिलाओं को आए दिन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शौचालय नहीं होने पर महिलाएं अक्सर सुनसान जगह ढूंढती हैं। वहां उनके लिए अराजकतत्वों का खतरा बना रहता है। शौचालय के अभाव में महिलाओं को परेशानी होती है। मजबूरन उन्हें खुले मे जाना पड़ता है।

 

*तो फिर सार्वजनिक शौचालय होने का क्या मतलब है…….?*

 

आस पास मे भी 500 मीटर के दायरे में कोई सार्वजनिक शौचालय नहीं है। जिसके चलते हर यात्री को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गौरतलब है कि बस स्टैंड के अंदर बने सुलभ कांपलेक्स में पुरुषों के लिए संपूर्ण सुविधा युक्त बने शौचालय का उपयोग मजबूरन महिला यात्रियों को भी करना पड़ रहा है । वजह मात्र महिला सुलभ शौचालय में एक लंबे अरसे से ताला लगा होने के कारण मजबूरन महिलाओं को इस प्रकार से शर्म का सामना करते हुए शौच करना पढ़ रहा है । कभी-कभी तो पुरुषों की कतार लगी होने के कारण महिलाएं शर्म वश मुंह छुपा कर अपनी प्रतीक्षा करती हैं । मजबूरन यात्रियों को खुले आम शौच करना पड़ रहा है ।आज तक जितने जनप्रतिनिधि हुए किसी का भी इस दिशा में जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई कदम नहीं उठाए गए।

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