मुहम्मदुर्रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहुअलैहिवसल्लम) ने फरमाया “उस (दौलतमंद) जैसे आदमियों से पूरी जमींन भी भरी हुई हो तो उनसे ये (मुफलिस/गरीब मुसलमान) बेहतर है..”
|
😊 Please Share This News 😊
|
*तलाक के मामले क्यु बढ़ रहे है…?*
हज़रत अबू हुरैरह रज़ि. से रिवायत है कि रसूलल्लाह सल्लल्लाहुअलैहिवसल्लम ने फरमाया जब तुम्हारे पास कोई ऐसा शख्स निकाह का पैग़ाम भेजे जिस का दीन और अख्लाक तुम पसंद करते हो उससे निकाह कर दो।
अगर तुम ऐसा न करोगे *तो जमीन में फ़ित्ना और बहुत बड़ा फसाद होगा!*
(सहीह)
बाहवाला:
जामेअ तिर्मिज़ी 1084,1085
मिश्कात उल मसाबीह 3090
रसुल ए अमीन हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहुअलैहिवसल्लम ने ईरशाद फरमाया…
“औरतो से (सिर्फ)उनके हुस्न की वजस से निकाह ना करो, हो सकता है उसका हुस्न तुम्हे तबाह कर दे,
ना उसके माल की वजह से निकाह करो, हो सकता है के उनका माल तुम्हे गुनाहों में डुबा दे,
बल्कि दिनदारी की वजह से निकाह किया करो…काली चपटी बदसूरत लड़की अगर दिनदार(Cultured/संस्कारी)हो तो बेहतर है”
REF-(इब्ने माजा-H1926)
अबु हुरैरा रजि. से रिवायत है कि नबी (ﷺ) ने फरमाया:
“औरत से निकाह चार वजहों से किया जाता है –
1. उसके माल की वजह से,
2. उसके खानदान की वजह से,
3. उसके हुस्न व जमाल की वजह से और
4.उसके दीनदारी की वजह से।”
तुम दीनदार औरत को तरजीह दो।”
(बुख़ारी 5090, मुस्लिम 2681, अबु दाऊद, नसई, इब्नेमाजा और तिर्मिजी)
नबी (ﷺ) ने फरमाया: “तुम में से जब कोई किसी औरत को निकाह का पैगाम दे, अगर मुमकिन हो तो उसे कुछ देख ले।
(मुसनद अहमद और अबुदाऊद 2063-सनद सही है)
अबु हुरैरा रजि. से रिवायत है, फरमाया नबी (ﷺ) ने कि –
“बेवा औरत का निकाह उससे सलाह किये बिना और कुंवारी औरत का निकाह उससे इजाजत लिये बिना न किया जाये। कुंवारी औरत की इजाजत “उसका ख़ामोश रहना है।”
(बुख़ारी 5136, मुस्लिम 2568
गरीब से गरीब मुसलमान की अहमियत!!
(VALUE-STATUS)
मफहूम-ए-हदीस: हज़रत सहल बिन साद (रज़ीअल्लाहुअन्हु) से रिवायत है कि उन्होने फ़रमाया मुहम्मदुर्रसूलुल्लाह सल्लल्लाहुअलैहिवसल्लम के पास से एक शख़्स गुज़रा…
आप (सल्लल्लाहु अलैहिवसल्लम) ने अपने पास बैठे हुए एक सहाबी से फरमाया “इस शख्स के बारे में तुम्हारी क्या राय है?”
उन्होंने अर्ज़ किया “ये तो खास (अमीर) लोगों में से है,अल्लाह की कसम! यह तो ऐसा आदमी है कि अगर किसी से रिश्ता मांगे तो उससे निकाह कर दिया जाएगा।
मुहम्मदुर्रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) खामोश हो गए, थोड़ी देर बाद एक और आदमी वहा से गुज़रा, आप (सल्लल्लाहुअलैहिवसल्लम वसल्लम) ने फरमाया “इस शख्स के बारे में तुम्हारी क्या राय है?”
उन्होने (सहाबी ने) अर्ज़ किया “या रसूलअल्लाह! ये तो मुफलिस (गरीब) मुसलमानो में एक (आम सा) आदमी है, ये तो अगर किसी से रिश्ता मांगे तो इसका निकाह नहीं होगा। अगर सिफारीश करे तो इसकी सिफारिश कुबूल ना हो,अगर बात करे तो कोई इसकी बात ना सुने”।
मुहम्मदुर्रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहुअलैहिवसल्लम) ने फरमाया “उस (दौलतमंद) जैसे आदमियों से पूरी जमींन भी भरी हुई हो तो उनसे ये (मुफलिस/गरीब मुसलमान) बेहतर है..”
Reference-
(सहीह बुखारी,किताबुर रिक़ाक,बाब फ़ज़ लुल फ़ख़र, हदीस- 6447)
(सुनन इब्ने माजा, हदीस- 4120)
Continue…
|
व्हाट्सप्प आइकान को दबा कर इस खबर को शेयर जरूर करें |

