आखिर पुजारियों को किस नियम के तहत दान की राशि दी जा रही है. – किस्मत न्यूज

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आखिर पुजारियों को किस नियम के तहत दान की राशि दी जा रही है.

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सारिका गुरु नाम की एक नागरिक ने इसकी शिकायत लोकायुक्त में की गयी है. लेकिन अभी लोकायुक्त ने इस मामले में कोई शिकायत दर्ज नहीं की है. ये वही सारिका गुरु हैं जिन्होंने महाकाल शिवलिंग के क्षरण की ओर सबका ध्यान दिलाया था और फिर केस सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था.

 

महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह, नंदी हॉल और नवग्रह मंदिर की दान पेटियों में श्रद्धालु जो भेंट चढ़ाते हैं उसका 35 % पुजारी , पुरोहित को मिलता है. इसी दान राशि का मसला उज्जैन की सारिका गुरु ने उठाया है. उन्होंने लोकायुक्त में एक शिकायत दर्ज कराई है. इसमें महाकाल मंदिर समिति के अध्यक्ष (कलेक्टर) प्रशासक सहित सहायक प्रशासक पर कार्रवाई के लिए उज्जैन लोकायुक्त में प्रकरण दर्ज करने की मांग की है.राशि को लेकर शिकायत करता सारिका गुरु ने इससे पहले भी महाकाल मंदिर क्षरण का मुद्दा उठाया था जो की सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था.

 

लोकायुक्त में शिकायत

 

शिकायत में सारिका ने बताया कि मंदिर में चढ़ी दान राशि का 35 प्रतिशत मंदिर के 16 पुजारियों को दिया जाता है. जबकि विभिन्न प्रकार के पूजन से होने वाली आय में से 75 फीसदी हिस्सा मंदिर के बाकी 22 पुरोहितों को मिलता है. सारिका गुरु ने 24 फरवरी को महाकाल मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष उज्जैन कलेक्टर प्रशासक सहित सहायक प्रशासक के खिलाफ लोकायुक्त उज्जैन में एक शिकायती आवेदन दिया है, हालाँकि लोकायुक्त ने अब तक कोई मामला दर्ज नहीं किया है.

 

 

दान राशि का ऐसा बंटवारा

 

उज्जैन के महाकाल मंदिर में अलग अलग 5 स्थानों पर श्रद्धालु दान भेंट पेटियों में डालकर जाते हैं. महाकाल मंदिर समिति की ओर से प्रतिमाह दान पेटी खोली जाती हैं. जब मंदिर समिति दान पेटी खोलती है तो इनमें से निकलने वाली दान राशि का 65% हिस्सा महाकाल मंदिर समिति लेती है. बाकी दान में से 35% हिस्सा मंदिर के 16 पुजारी, पुरोहित को मिलता है. सारिका गुरु का कहना है दान राशि का ऐसा बंटवारा सन 1985 से चला आ रहा है. जबकि महाकाल मंदिर के एक्ट में कहीं भी इस बात का उल्लेख नहीं है कि बंटवारा ऐसे हो. 37 साल से महाकाल मंदिर के पुजारियों को दान की राशि का 35% किस आधार पर दिया जा रहा है.

 

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मंदिर समिति पर सवाल

 

सारिका गुरु ने लोकायुक्त उज्जैन में शिकायत दर्ज कराई है. इसमें कहा गया है महाकाल मंदिर एक्ट में भेंट पेटियों का 35% हिस्सा पुजारियों को देने का कोई वैधानिक प्रावधान नहीं है. इसके बावजूद प्रशासक संदीप सोनी, अध्यक्ष कुमार पुरुषोत्तम, पूर्व प्रशासक गणेश धाकड़ असामाजिक व्यक्तियों से षडयंत्र और सांठगांठ करके अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं. ये लोग भ्रष्टाचार कर शासन को करोडों रूपये की आर्थिक क्षति पहुंचा रहे हैं. इसी तरह अभिषेक से होने वाली आय का 75 प्रतिशत पुरोहितों को दिया जा रहा है. गर्भगृह में दर्शन से आने वाली राशि का 75 प्रतिशत पुजारियों पुरोहितों को दी जा रही है. जबकि इसका भी वैधानिक प्रावधान नहीं है.

 

महाकाल मंदिर के इन पुजारियों को मिलता है 35% हिस्सा

 

गौरव शर्मा,पुजारी दिलीप शर्मा, पुजारी विजय शंकर शर्मा, पुजारी विजय शर्मा, पुजारी श्रीराम शर्मा,पुजारी गणेश नारायण शर्मा,पुजारी संजय शर्मा,पुजारी अजय शर्मा,पुजारी कैलाश नारायण शर्मा,पुजारी अमर शर्मा,पुजारी स्व शान्तिकुमार,पुजारी राजेश शर्मा,पुजारी घनश्याम शर्मा, पुजारी दिनेश त्रिवेदी,पुजारी कमल शर्मा

 

इन पुरोहितो को पूजा का 75% हिस्सा

 

शरदचंद्र व्यास,विनोद व्यास,राधेशयाम शास्त्री,कौशल व्यास,चंद्र शेखर शर्मा,सुभाष शर्मा,बालकृष्ण जोशी,अजय शर्मा,स्व सूर्यनारायण जोशी,नीरज शर्मा,विजय उपाध्याय,लोकेन्द्र व्यास,अशोक शर्मा,स्व रवि पंडित,दीपक भट्ट,मुकेश शर्मा,स्व गणेश नारायण,विपुल चतुर्वेदी,गोपाल व्यास,दीपक शर्मा,गोपाल शर्मा, विश्वास कराडकर.

 

सरकारी पंडित का मानदेय

 

महाकाल मंदिर समिति की तरफ से घनश्याम पुजारी सरकारी पंडित नियुक्त हैं. इन्हे मंदिर की ओर से प्रतिमाह 21000 हजार रुपए के साथ साथ दान पेटियों का 35 प्रतिशत भी मिलता है. इसके अलावा इनके चार सहायक मंगलेश गुरु, अजय पुजारी, शैलन्द्र पुजारी और गोपाल गुरु को 11-11 हजार प्रतिमाह दिया जाता है.

 

मंदिर समिति ने कहा

 

उज्जैन महाकाल मंदिर के प्रशासक संदीप सोनी ने बताया कि दान पेटी का 35 प्रतिशत हिस्सा 16 पुजारियों को प्रबंध समिति की सहमति से दिया जा रहा है. 20 दिसंबर 2012 को मंदिर प्रबन्ध समिति का यह निर्णय एक्ट के अनुसार लिया गया है. 2016 में हाईकोर्ट की डबल बेंच ने मंदिर प्रबंध समिति का हवाला देकर इसे यथावत रखने का निर्णय दिया था.

 

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